Friday, September 18, 2026

झारखंड में गैर-शैक्षणिक डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र 67 से घटकर 65 वर्ष होगी.

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रांची: झारखंड सरकार ने गैर-शैक्षणिक और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति आयु को लेकर बड़ा बदलाव किया है। अब इन डॉक्टरों की रिटायरमेंट उम्र 67 वर्ष के बजाय 65 वर्ष होगी। कैबिनेट की मंजूरी के बाद स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक संकल्प जारी कर दिया है।

हालांकि, नई व्यवस्था तुरंत लागू नहीं होगी। विभागीय संकल्प के अनुसार, संकल्प जारी होने की तारीख से दो वर्ष पूरा होने के बाद 65 वर्ष की नई सेवानिवृत्ति आयु प्रभावी होगी। इसके साथ ही 17 अगस्त 2022 को जारी वह पुराना संकल्प भी निरस्त माना जाएगा, जिसके तहत सेवानिवृत्ति आयु बढ़ाकर 67 वर्ष की गई थी।

कोरोना महामारी के दौरान सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की कमी और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़े दबाव को देखते हुए गैर-शैक्षणिक एलोपैथिक चिकित्सकों की सेवानिवृत्ति उम्र 65 से बढ़ाकर 67 वर्ष की गई थी। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि उस समय की आपात परिस्थितियां अब सामान्य हो चुकी हैं, इसलिए उस व्यवस्था को आगे जारी रखने की आवश्यकता नहीं है।

विभाग ने अपने निर्णय में राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों और चिकित्सकों की तैनाती से जुड़ी चुनौतियों का भी उल्लेख किया है। विशेष रूप से ग्रामीण, सुदूर और पहाड़ी क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता को लेकर विभाग ने कई पहलुओं को ध्यान में रखा है। संकल्प में कहा गया है कि कुछ वरिष्ठ चिकित्सकों ने अधिक उम्र अथवा स्वास्थ्य संबंधी कारणों से दुर्गम क्षेत्रों में पदस्थापन को लेकर असमर्थता जताई है।

स्वास्थ्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह की ओर से जारी संकल्प में प्रशासनिक जिम्मेदारियों से जुड़े मामलों का भी जिक्र है। विभाग के अनुसार, वरीयता के आधार पर वरिष्ठ चिकित्सकों को प्रशासनिक दायित्व सौंपे जाने के मामलों में भी कुछ चिकित्सकों की ओर से असमर्थता सामने आई है।

65 वर्ष की नई सेवानिवृत्ति आयु लागू करने के लिए झारखंड सेवा संहिता के नियम-73 में आवश्यक संशोधन किया जाएगा। विभाग ने अपने निर्णय के समर्थन में केंद्र सरकार के वर्ष 2016 के आदेश और कुछ अन्य राज्यों में लागू सेवानिवृत्ति व्यवस्था का भी उल्लेख किया है।

सरकार ने डॉक्टरों की उपलब्धता बनाए रखने के लिए नई नियुक्तियों की प्रक्रिया पर भी जोर दिया है। विभाग के अनुसार, 176 विशेषज्ञ चिकित्सा पदाधिकारी, 338 चिकित्सा पदाधिकारी, 13 दंत चिकित्सक और 55 सहायक प्राध्यापकों समेत कुल 582 नियुक्तियां की गई हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के माध्यम से भी अलग-अलग पदों पर चिकित्सकों की नियुक्ति की गई है।

नई व्यवस्था के लागू होने तक मौजूदा चिकित्सकों को दो साल का समय मिलेगा। इस अवधि में सेवा संहिता में संशोधन और चिकित्सकों की उपलब्धता से संबंधित व्यवस्थाओं को आगे बढ़ाया जाएगा। दो साल बाद गैर-शैक्षणिक और विशेषज्ञ चिकित्सकों के लिए सेवानिवृत्ति की अधिकतम आयु 65 वर्ष हो जाएगी।

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