Thursday, September 17, 2026

झारखंड पुलिस को हाईटेक बनाने की तैयारी, सुरक्षा से लेकर क्राइम सीन जांच तक तकनीकी उपकरणों पर जोर.

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रांची। अपराध के बदलते तौर-तरीकों के बीच झारखंड पुलिस अपनी सुरक्षा और जांच व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की तैयारी कर रही है। पुलिस मुख्यालय की ओर से जारी दस्तावेजों के मुताबिक, सुरक्षा, निगरानी और अपराध अनुसंधान से जुड़े कई आधुनिक उपकरणों की खरीद और तकनीकी जांच की प्रक्रिया चल रही है।

500 फुल बॉडी प्रोटेक्टर की खरीद का प्रस्ताव

पुलिस मुख्यालय के दस्तावेजों में 500 फुल बॉडी प्रोटेक्टर की खरीद का उल्लेख है। इसके अलावा पांच इलेक्ट्रॉनिक लेक्टर्न पोडियम की खरीद भी प्रस्तावित है।

वहीं, रियल टाइम व्यूइंग सिस्टम के लिए तकनीकी रूप से सफल कंपनियों के नमूनों का परीक्षण किया जाना है। इन उपकरणों की उपयोगिता और तकनीकी मानकों की जांच के बाद आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

झारखंड जगुआर और सुरक्षा शाखा करेगी परीक्षण

उपकरणों के नमूनों के निरीक्षण और फील्ड ट्रायल की जिम्मेदारी झारखंड जगुआर, विशेष सूचना ब्यूरो और सुरक्षा शाखा के अधिकारियों को दी गई है। फील्ड ट्रायल के जरिए यह देखा जाएगा कि संबंधित उपकरण वास्तविक परिस्थितियों में पुलिस की जरूरतों के अनुरूप कितने उपयोगी हैं।

क्राइम सीन से साक्ष्य जुटाने पर भी फोकस

पुलिस के आधुनिकीकरण की योजना केवल जवानों की सुरक्षा तक सीमित नहीं है। अपराध की जांच में वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने के लिए भी विभिन्न उपकरणों की खरीद प्रक्रिया चल रही है।

पुलिस की आधिकारिक निविदाओं में साक्ष्य पैकिंग एवं संग्रह किट, क्राइम सीन जांच किट और फिंगरप्रिंट किट जैसी सामग्री से जुड़े टेंडर शामिल हैं। इन संसाधनों से घटनास्थल से मिले साक्ष्यों को व्यवस्थित तरीके से एकत्र करने, सुरक्षित रखने और जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया को मजबूत किया जा सकता है।

इसके साथ ही कंप्यूटर और अन्य तकनीकी संसाधनों की खरीद पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

अभियान वाले इलाकों में आधुनिक संसाधनों की जरूरत

झारखंड के संवेदनशील और दुर्गम इलाकों में अभियान के दौरान आधुनिक संचार एवं निगरानी उपकरण पुलिस के लिए उपयोगी रहे हैं। ऐसे अभियानों में दूरबीन, नाइट विजन उपकरण, सैटेलाइट फोन, जीपीएस और वायरलेस संचार जैसे संसाधनों की जरूरत पड़ती है।

नई खरीद प्रक्रिया के जरिए पुलिस के तकनीकी संसाधनों का दायरा बढ़ाने की कोशिश की जा रही है, खासकर उन परिस्थितियों के लिए जहां संचार, निगरानी और जवानों की सुरक्षा चुनौतीपूर्ण होती है।

साइबर अपराध की जांच भी बड़ी चुनौती

डिजिटल प्लेटफॉर्म के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध की जांच भी पुलिस के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र बन गया है। फर्जी पहचान, ऑनलाइन ठगी, डिजिटल साक्ष्य और सोशल मीडिया से जुड़े मामलों की जांच में तकनीकी क्षमता की भूमिका लगातार बढ़ रही है।

हालांकि उपलब्ध पुलिस दस्तावेजों में किसी विशिष्ट AI आधारित सोशल मीडिया निगरानी प्रणाली की खरीद का स्पष्ट उल्लेख नहीं है। इसलिए ऐसी किसी प्रणाली को मौजूदा खरीद प्रक्रिया का हिस्सा बताना फिलहाल उचित नहीं होगा।

रियल टाइम व्यूइंग सिस्टम की होगी तकनीकी जांच

पुलिस मुख्यालय की खरीद प्रक्रिया में रियल टाइम व्यूइंग सिस्टम भी शामिल है। इसके लिए कंपनियों के तकनीकी नमूनों का परीक्षण किया जाना है। इस तरह की प्रणाली लाइव वीडियो या निगरानी से जुड़े दृश्यों को देखने में उपयोगी हो सकती है, लेकिन उपलब्ध दस्तावेजों में इसके अंतिम उपयोग का विस्तृत विवरण नहीं दिया गया है।

कुल मिलाकर, पुलिस मुख्यालय की मौजूदा खरीद प्रक्रिया में जवानों की सुरक्षा, घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने, संचार और निगरानी जैसी जरूरतों के लिए तकनीकी संसाधनों को बढ़ाने पर जोर दिखाई दे रहा है।

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