Thursday, September 17, 2026

रात में कंधे का दर्द क्यों बढ़ जाता है? करवट बदलते ही होती है तकलीफ तो इन संकेतों को न करें नजरअंदाज.

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कंधे में दर्द की समस्या दिनभर काम करने के दौरान उतनी परेशान नहीं करती, लेकिन रात में बिस्तर पर लेटने के बाद इसकी तीव्रता बढ़ सकती है। मेडिकल भाषा में रात के समय होने वाले इस तरह के दर्द को नॉक्टर्नल शोल्डर पेन कहा जाता है। प्रभावित कंधे की तरफ करवट लेने, हाथ की स्थिति बदलने या लंबे समय तक एक ही मुद्रा में रहने पर तकलीफ बढ़ सकती है और नींद बार-बार टूट सकती है।

ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञों के मुताबिक, कभी-कभार होने वाला रात का दर्द दिनभर कंधे पर अधिक दबाव पड़ने या मामूली मांसपेशीय खिंचाव से जुड़ा हो सकता है। लेकिन अगर लगातार एक ही कंधे पर सोना मुश्किल हो रहा है या दर्द कई दिनों तक बना हुआ है, तो कंधे के जोड़, टेंडन या आसपास के ऊतकों की समस्या की जांच कराना जरूरी हो सकता है।

कंधे की संरचना और उसकी लगातार होने वाली गतिविधियां रात के दर्द को समझने में अहम भूमिका निभाती हैं। कई मांसपेशियां और टेंडन मिलकर हाथ को ऊपर, पीछे और अलग-अलग दिशाओं में घुमाने में मदद करते हैं। दिन में शरीर सक्रिय रहता है, जबकि रात में लंबे समय तक एक ही स्थिति में रहने और प्रभावित हिस्से पर दबाव पड़ने से पहले से मौजूद सूजन या टेंडन की समस्या अधिक महसूस हो सकती है।

हर कंधे का दर्द सीधे कंधे के जोड़ से ही जुड़ा हो, यह जरूरी नहीं है। गर्दन की नसों पर दबाव पड़ने से भी दर्द कंधे तक पहुंच सकता है और हाथ में फैल सकता है। मांसपेशियों में खिंचाव या टेंडन में बदलाव भी इसके कारण हो सकते हैं। वहीं, अचानक कंधे में तेज दर्द या दबाव के साथ सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या असामान्य पसीना आए, तो इसे सामान्य कंधे का दर्द मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए और तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।

रात में बढ़ने वाला कंधे का दर्द रोटेटर कफ की समस्या, टेंडन में सूजन या क्षति, बर्साइटिस, फ्रोजन शोल्डर और आर्थराइटिस जैसी स्थितियों से जुड़ा हो सकता है। फ्रोजन शोल्डर में दर्द के साथ धीरे-धीरे कंधे की गति भी सीमित होने लगती है। हाथ ऊपर उठाने, कपड़े पहनने या पीठ के पीछे हाथ ले जाने जैसे सामान्य काम मुश्किल हो सकते हैं। रोटेटर कफ की समस्या में सिर के ऊपर हाथ ले जाने या वजन उठाने पर दर्द और कमजोरी महसूस हो सकती है।

कंधे के दर्द को ज्यादा गंभीरता से तब लेना चाहिए, जब इसका असर नींद के साथ-साथ रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी पड़ने लगे। रात में बार-बार नींद खुलना, लगातार करवट बदलना, कपड़े पहनने में परेशानी, पीठ के पीछे हाथ ले जाने में कठिनाई, ऊंची जगह से सामान उतारने में दिक्कत या कंधे में कमजोरी ऐसे संकेत हैं जिन पर ध्यान देना चाहिए। कई दिनों तक दर्द में सुधार न होना भी जांच कराने का कारण हो सकता है।

हर कंधे के दर्द में लंबे समय तक आराम करना सही तरीका नहीं है। मामूली खिंचाव या चोट में आराम से राहत मिल सकती है, लेकिन कंधे को लंबे समय तक बिल्कुल स्थिर रखने से अकड़न बढ़ सकती है। इसलिए समस्या के कारण के अनुसार गतिविधियों में बदलाव और उचित व्यायाम अधिक उपयोगी हो सकते हैं। बिना जांच के इंटरनेट पर बताए गए स्ट्रेच या एक्सरसाइज करना हर व्यक्ति के लिए उपयुक्त नहीं होता, खासकर जब हाथ में कमजोरी या उसकी गति में काफी कमी हो।

डॉक्टर से सलाह लेते समय सिर्फ दर्द की जगह बताना पर्याप्त नहीं है। यह भी बताना चाहिए कि दर्द कब शुरू हुआ, रात में किस स्थिति में बढ़ता है, कौन-सी गतिविधि से तकलीफ होती है और क्या यह किसी चोट या भारी शारीरिक काम के बाद शुरू हुआ था। अगर दर्द के कारण नींद प्रभावित हो रही है, तो यह जानकारी भी डॉक्टर को जरूर देनी चाहिए।

गिरने या चोट लगने के बाद अचानक दर्द शुरू होना और हाथ उठाने में परेशानी, कंधे में बहुत अधिक सूजन, असामान्य आकार दिखाई देना, अचानक कमजोरी या हाथ का इस्तेमाल न कर पाना ऐसी स्थितियां हैं, जिनमें जल्द चिकित्सकीय जांच जरूरी है। बिना चोट के भी अगर दर्द लगातार बढ़ रहा है या कई हफ्तों से नींद प्रभावित हो रही है, तो ऑर्थोपेडिक विशेषज्ञ से परामर्श लेना उचित है।

रात में कंधे को आराम देने के लिए प्रभावित हिस्से पर सीधे वजन डालने से बचा जा सकता है। दूसरी तरफ करवट लेकर सोने पर तकिए की मदद से दर्द वाले हाथ को सहारा देने से कुछ लोगों को राहत मिल सकती है। कुछ लोगों के लिए पीठ के बल सोना भी अधिक आरामदायक हो सकता है। हालांकि, सोने की स्थिति बदलने से अस्थायी राहत मिल सकती है, लेकिन लगातार बने रहने वाले दर्द में मूल कारण का पता लगाना ज्यादा महत्वपूर्ण है।

कंधे का दर्द कई अलग-अलग कारणों से हो सकता है और उपचार भी उसी के अनुसार तय होता है। डॉक्टर जरूरत के मुताबिक शारीरिक जांच के अलावा एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड या एमआरआई जैसे परीक्षण की सलाह दे सकते हैं। इसलिए अगर दर्द आपकी नींद और सामान्य गतिविधियों को प्रभावित करने लगा है, तो इसे केवल थकान या उम्र से जुड़ी परेशानी मानकर टालने के बजाय विशेषज्ञ से जांच कराना बेहतर है।

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