रांचीः अपराध विज्ञान, फॉरेंसिक साइंस, साइबर सिक्योरिटी और राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में करियर बनाने के इच्छुक युवाओं के बीच रांची स्थित झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय का आकर्षण लगातार बढ़ रहा है. देश का तीसरा रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय इस शैक्षणिक सत्र में नए पाठ्यक्रमों, बढ़ते नामांकन और रोजगारोन्मुख शिक्षा के कारण चर्चा में है.
- रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करना है, जो पुलिस, केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों, फॉरेंसिक लैब, साइबर जांच एजेंसियों और निजी सुरक्षा क्षेत्र में अपनी सेवाएं दे सकें. इस सत्र में विश्वविद्यालय ने पाठ्यक्रमों का दायरा भी बढ़ाया है. स्नातक स्तर पर क्रिमिनोलॉजी (Criminology) का नया कोर्स शुरू किया गया है, जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप तैयार किया गया है.
- वहीं स्नातकोत्तर स्तर पर डिजास्टर मैनेजमेंट, कंप्यूटर साइंस, साइबर सिक्योरिटी समेत कई रोजगारपरक पाठ्यक्रम शुरू किए गए हैं. इसके अलावा फॉरेंसिक साइंस अब भी विद्यार्थियों की पहली पसंद बनी हुई है. विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि बदलते दौर में साइबर अपराध और डिजिटल जांच की बढ़ती जरूरत को देखते हुए इन विषयों की मांग लगातार बढ़ रही है.
- विश्वविद्यालय के रजिस्ट्रार डॉ. हिमेंद्र कुमार भगत ने बताया कि इस वर्ष नामांकन को लेकर विद्यार्थियों में काफी उत्साह है. उन्होंने कहा कि देश के अलग-अलग राज्यों से आवेदन प्राप्त हुए हैं। 11 जुलाई को इंटरव्यू आयोजित किया जाएगा, जिसके बाद चयन प्रक्रिया पूरी होगी. विद्यार्थियों का रुझान खासकर फॉरेंसिक साइंस, साइबर सिक्योरिटी और क्रिमिनोलॉजी जैसे विषयों की ओर तेजी से बढ़ा है.
- उन्होंने बताया कि विश्वविद्यालय में पढ़ाई को पूरी तरह रोजगारोन्मुख बनाने पर जोर दिया जा रहा है. प्लेसमेंट को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. कुछ हद तक विद्यार्थियों को प्लेसमेंट भी मिल रही है. हमारा प्रयास है कि आने वाले समय में और अधिक कंपनियों, सुरक्षा एजेंसियों तथा सरकारी संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित कर बेहतर प्लेसमेंट उपलब्ध कराया जाए.
- डॉ. हिमेंद्र भगत ने कहा कि विश्वविद्यालय सामाजिक समावेशन को भी प्राथमिकता दे रहा है. टाना भगत समुदाय के बच्चों के लिए पहले एक वर्ष का विशेष आवासीय कोर्स संचालित किया जाता था, जिसे अब बढ़ाकर तीन वर्ष कर दिया गया है. इसका उद्देश्य उन्हें आधुनिक शिक्षा के साथ सुरक्षा और पुलिस प्रशासन से जुड़े विषयों का बेहतर प्रशिक्षण उपलब्ध कराना है. इसके साथ ही झारखंड के विद्यार्थियों के लिए राज्य सरकार के आरक्षण रोस्टर का भी पालन किया जा रहा है, ताकि स्थानीय युवाओं को अधिक अवसर मिल सकें.
- विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने आवेदन किया है और 11 जुलाई को प्रवेश के लिए साक्षात्कार (इंटरव्यू) आयोजित किया जाएगा. वर्ष 2016 में स्थापित यह विश्वविद्यालय सुरक्षा शिक्षा के क्षेत्र में देश के चुनिंदा संस्थानों में शामिल है. गुजरात के गांधीनगर और राजस्थान के जोधपुर के बाद झारखंड में स्थापित यह विश्वविद्यालय अपराध विज्ञान, फॉरेंसिक साइंस, साइबर सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा और आपदा प्रबंधन जैसे विषयों में विशेषज्ञ शिक्षा प्रदान कर रहा है.
- फिलहाल विश्वविद्यालय रांची में अस्थायी परिसर से संचालित हो रहा है, जबकि खूंटी में 75 एकड़ भूमि पर स्थायी परिसर के निर्माण की योजना पर काम चल रहा है. स्थायी कैंपस बनने के बाद विश्वविद्यालय पूरी तरह आवासीय होगा और हजारों विद्यार्थियों को आधुनिक प्रयोगशालाओं, स्मार्ट क्लासरूम, पुस्तकालय, खेल सुविधाओं और छात्रावास की सुविधा मिलेगी.
रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा, साइबर अपराध, फॉरेंसिक जांच और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में विशेषज्ञों की मांग तेजी से बढ़ रही है. ऐसे में झारखंड रक्षा शक्ति विश्वविद्यालय युवाओं को केवल डिग्री ही नहीं, बल्कि कौशल आधारित और रोजगारोन्मुख शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में लगातार काम कर रहा है. नए पाठ्यक्रम, बढ़ते नामांकन, प्लेसमेंट पर बढ़ता फोकस और स्थायी परिसर की योजना के साथ विश्वविद्यालय आने वाले वर्षों में सुरक्षा शिक्षा के क्षेत्र में अपनी राष्ट्रीय पहचान को और मजबूत करने की तैयारी में जुटा है.



