रांची: झारखंड में कृषि उत्पादन बाजार समितियों की दुकानों और गोदामों का किराया बढ़ाने के फैसले से व्यापारियों में नाराजगी है। झारखंड राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने राज्य की सभी 28 बाजार समितियों के लिए नई किराया दरें निर्धारित की हैं। जारी अधिसूचना के अनुसार, बढ़ी हुई दरें 1 नवंबर 2026 से लागू होनी हैं।
बोर्ड ने बाजार समितियों को तीन श्रेणियों में बांटकर प्रति वर्ग फुट न्यूनतम मासिक किराया तय किया है। बोर्ड का कहना है कि इस कदम से बाजार समितियों की आय बढ़ेगी और आर्थिक रूप से कमजोर समितियों को अपने संसाधन मजबूत करने में मदद मिलेगी। दूसरी ओर, व्यापारियों ने फैसले का विरोध करते हुए बढ़ा हुआ किराया नहीं देने की चेतावनी दी है।
तीन श्रेणियों में तय की गईं किराये की दरें
झारखंड राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने 24 सितंबर को निदेशक मंडल की बैठक में लिए गए फैसले के बाद नई दरों की अधिसूचना जारी की। बाजार समितियों को A, B और C श्रेणियों में बांटकर किराया निर्धारित किया गया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, A श्रेणी में रांची, जमशेदपुर, धनबाद और देवघर को शामिल किया गया है। इन बाजार समितियों में दुकानों और गोदामों के लिए 9 रुपये प्रति वर्ग फुट मासिक किराया निर्धारित किया गया है।
B श्रेणी में हजारीबाग समेत अन्य बाजार समितियां और C श्रेणी में खूंटी समेत कई बाजार समितियां शामिल हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी में B और C श्रेणियों की सभी समितियों तथा उनकी किराया दरों का पूरा विवरण नहीं दिया गया है।
रांची में करीब 80%, धनबाद में 125% तक बढ़ोतरी का दावा
नई दरों का असर रांची और धनबाद की बाजार समितियों में स्पष्ट दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, रांची के पंडरा बाजार समिति में दुकानों और गोदामों का किराया 5 रुपये से बढ़ाकर 9 रुपये प्रति वर्ग फुट मासिक कर दिया गया है। इसे करीब 80 प्रतिशत की वृद्धि बताया गया है।
वहीं, धनबाद में किराया 4 रुपये से बढ़ाकर 9 रुपये प्रति वर्ग फुट किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके आधार पर किराये में लगभग 125 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है।
इन बदलावों से दुकानदारों और गोदाम संचालकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ने की आशंका है। व्यापारियों का कहना है कि किराया बढ़ाने से पहले बाजार समितियों में बुनियादी सुविधाओं की स्थिति सुधारने पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
विपणन बोर्ड ने बताया आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास
झारखंड राज्य कृषि विपणन बोर्ड के अध्यक्ष रवींद्र सिंह के मुताबिक, नई दरें वर्ष 2019 में लिए गए निर्णय के आधार पर निर्धारित की गई हैं। उन्होंने कहा कि पहले किराया तय करने में अलग-अलग स्तर पर मनमानी की शिकायतें सामने आती थीं, जिसके कारण विवाद और कानूनी मामले उत्पन्न होते थे।
बोर्ड का तर्क है कि किराया बढ़ने से बाजार समितियों की आय में सुधार होगा। कुछ समितियां पर्याप्त आमदनी नहीं होने के कारण अपने कर्मचारियों को वेतन देने में भी परेशानी का सामना करती हैं। नई व्यवस्था से इन समितियों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने और आवश्यक संसाधन जुटाने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
बढ़े हुए किराये के खिलाफ आंदोलन की तैयारी
रांची बाजार समिति चैंबर ऑफ कॉमर्स ने किराया वृद्धि के फैसले का विरोध किया है। चैंबर के अध्यक्ष संजय कुमार महली ने कहा कि व्यापारी बढ़ी हुई दरों पर किराया नहीं देंगे। उनके अनुसार, राज्य की विभिन्न बाजार समितियों के व्यवसायी भी इस फैसले के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं।
व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि किराया वृद्धि का निर्णय वापस नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में आंदोलन तेज किया जा सकता है।
बुनियादी सुविधाओं की कमी पर व्यापारियों ने उठाए सवाल
व्यापारियों का आरोप है कि कई बाजार समितियों में सड़क, बिजली, पानी और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कुछ दुकानों और गोदामों की हालत भी जर्जर बताई गई है।
चैंबर अध्यक्ष संजय कुमार महली का कहना है कि जब व्यापारियों को जरूरी सुविधाएं पर्याप्त रूप से नहीं मिल रही हैं, तो किराया बढ़ाने का फैसला उनके लिए अतिरिक्त परेशानी पैदा करेगा।
व्यापारियों ने यह भी सवाल उठाया है कि किराया वृद्धि से जुड़ा मामला पहले से अदालत में लंबित होने की स्थिति में बोर्ड नई दरें कैसे लागू कर सकता है। हालांकि, इस कानूनी मामले की वर्तमान स्थिति और नई अधिसूचना पर उसके प्रभाव की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
1 नवंबर से लागू हो सकती हैं नई दरें
बोर्ड की अधिसूचना के मुताबिक, नई किराया दरें 1 नवंबर 2026 से लागू करने का निर्णय लिया गया है। ऐसे में आने वाले दिनों में बोर्ड और व्यापारियों के बीच इस मुद्दे पर टकराव बढ़ने की आशंका है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि विपणन बोर्ड व्यापारियों की आपत्तियों पर क्या रुख अपनाता है और क्या किराया वृद्धि के फैसले में कोई बदलाव किया जाता है।
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