नई दिल्ली: देश का वस्तु एवं सेवा कर (GST) कलेक्शन मई 2026 में भी बहुत मजबूत रहा. इस महीने कुल ₹1.94 लाख करोड़ का ग्रॉस जीएसटी टैक्स मिला. पिछले साल मई 2025 में टेलीकॉम स्पेक्ट्रम का ₹10,000 करोड़ का एकमुश्त बड़ा भुगतान हुआ था. अगर उस असाधारण कमाई को हटाकर देखें, तो इस साल मई में ग्रॉस जीएसटी कलेक्शन में 9% और रिफंड के बाद नेट कलेक्शन में करीब 10% की असली बढ़ोतरी हुई है. आर्थिक जानकारों के अनुसार, यह ग्रोथ देश में चल रही अच्छी आर्थिक गतिविधियों और बेहतर टैक्स नियमों के पालन को दिखाती है. सामान्य तौर पर ग्रॉस जीएसटी में 3.2% और नेट जीएसटी में 3.3% की बढ़त दर्ज की गई है.
गुड्स सेक्टर में 27% का बड़ा उछाल
एक सीनियर सरकारी अधिकारी ने बताया, “अप्रैल 2026 में गुड्स सेक्टर की टैक्स योग्य सप्लाई करीब 27% बढ़ी है. यह ₹31.61 लाख करोड़ से बढ़कर ₹40.10 लाख करोड़ हो गई. सबसे अच्छी बात यह है कि सभी 27 कमोडिटी ग्रुप्स में अच्छी बढ़त हुई है, जो यह बताती है कि देश के बाजारों में सामान की मांग बहुत मजबूत है.” उन्होंने आगे कहा, “यह बढ़त किसी एक क्षेत्र में नहीं है, बल्कि खेती, मैन्युफैक्चरिंग, केमिकल्स, मेटल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स और रोजमर्रा के सामान में एक साथ आई है. देश की अर्थव्यवस्था में यह असली मांग सितंबर 2025 में जीएसटी दरों में किए गए सुधारों की वजह से दिख रही है.”
सर्विसेज सेक्टर की मजबूत पकड़
सामान के अलावा, सर्विसेज (सेवा) सेक्टर ने भी बाजार में अपनी मजबूती बनाए रखी है. अधिकारी ने जानकारी दी कि “इस वित्तीय वर्ष के अप्रैल महीने में सर्विसेज सेक्टर की टैक्स योग्य सप्लाई 22% बढ़ी है. यह ₹9.41 लाख करोड़ से बढ़कर ₹11.50 लाख करोड़ पर पहुंच गई. हर बड़ी सर्विस कैटेगरी में बढ़त दर्ज की गई है, जो घरेलू खपत को दिखाती है. रियल एस्टेट, कंस्ट्रक्शन और ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में यह उछाल देश में बढ़ते निवेश और मांग की कहानी बयां करता है.”
मैन्युफैक्चरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स को रफ्तार
मई 2026 के आंकड़ों में सबसे बड़ा बदलाव विदेशों से आने वाले सामान (इम्पोर्ट) पर लगने वाले आईजीएसटी (IGST) कलेक्शन में दिखा है, जो करीब 20% बढ़ा है. टैक्स अधिकारियों के मुताबिक, “यह बढ़त तैयार सामानों के बजाय फैक्ट्रियों के कच्चे माल और ऊर्जा इनपुट के आयात से हुई है. इसे आने वाले समय में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में होने वाली बड़ी हलचल का शुरुआती संकेत माना जाता है.”
इस दौरान कई खास क्षेत्रों में भारी निवेश दिखा:
- इलेक्ट्रॉनिक्स: बाहर से आने वाले प्रोसेसिंग यूनिट्स पर टैक्स 387% और मेमोरी चिप्स पर 205% बढ़ा.
- मेटल्स: अनरिफाइंड कॉपर एनोड्स में 219% और कॉपर ओर कंसंट्रेट्स में 94% की बढ़त हुई. एल्युमीनियम स्क्रैप का इम्पोर्ट भी 46% बढ़ा.
- क्लीन एनर्जी: लिथियम-आयन बैटरी के आयात में लगभग 66% की बढ़ोतरी हुई, जिसकी मांग इलेक्ट्रिक वाहनों और एनर्जी स्टोरेज प्रोजेक्ट्स में है.
- कोयला: कोयले के आयात से मिलने वाले टैक्स में 391% का भारी उछाल आया, जो पावर और स्टील प्लांटों की बड़ी मांग को दिखाता है.


