पेशाब करना शरीर का एक नॉर्मल और जरूरी प्रोसेस है. यह शरीर से ज्यादा पानी, नमक और टॉक्सिन को बाहर निकालने में मदद करता है. एक हेल्दी इंसान आमतौर पर हर दिन लगभग 1.5 से 2 लीटर पेशाब करता है. लेकिन, अगर आपको हर दिन कम पेशाब आता है, तो यह किसी अंदरूनी प्रॉब्लम का संकेत हो सकता है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कई लोग कम पेशाब आने को काफी पानी न पीने की वजह मानते हैं, लेकिन अगर यह प्रॉब्लम लंबे समय तक बनी रहे, तो इसे इग्नोर नहीं करना चाहिए. कम पेशाब आने की प्रॉब्लम को ओलिगुरिया Oliguria कहते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, इस खबर में इसके कारणों, लक्षणों और दूसरी डिटेल्स के बारे में डिटेल में जानिए…
ओलिगुरिया क्या है?
क्लीवलैंड क्लिनिक की वेबसाइट के मुताबिक मेडिकल टर्मिनोलॉजी में, ‘ओलिगुरिया’ का मतलब है शरीर से निकलने वाले यूरिन की मात्रा में काफी कमी आना, मतलब कि यूरिन नॉर्मल से बहुत कम बार आता है. मूत्र उत्पादन प्रतिदिन 400 मिलीलीटर से कम होता है. गर्मी, बहुत ज्यादा पसीना आने या कम पानी पीने की वजह से यूरिन का आउटपुट कुछ समय के लिए कम होना नॉर्मल है. लेकिन, दिन भर में बहुत कम यूरिन आना (खूब पानी पीने के बाद भी) किडनी या यूरिनरी ट्रैक्ट से जुड़ी गंभीर अंदरूनी समस्याओं का संकेत हो सकता है. ऐसी कंडीशन में तुरंत मेडिकल मदद की जरूरत होती है.
शुरुआती लक्षण
- पेशाब कम आना: काफी पानी या लिक्विड पीने के बाद भी, बहुत कम पेशाब आता है या बहुत कम पेशाब आता है.
- दूसरे लक्षण: गहरे रंग का पेशाब, बहुत ज्यादा प्यास लगना, मुंह सूखना, थकान, पैरों या चेहरे पर सूजन, जी मिचलाना, चक्कर आना और पेट में तकलीफ.
- गंभीर लक्षण: अगर समस्या गंभीर है, तो सांस लेने में दिक्कत, कन्फ्यूजन या पेशाब पूरी तरह से न कर पाना भी हो सकता है.
कारण क्या हैं?
डिहाइड्रेशन: इसका मुख्य कारण बुखार, डायरिया, उल्टी या कम पानी पीने से शरीर में पानी की कमी होना है.
किडनी की समस्याएं: एक्यूट किडनी इंजरी (अचानक किडनी डैमेज), किडनी स्टोन, यूरिनरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन (UTIs) और क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से यूरिन कम हो सकता है.
रुकावट: पुरुषों में यह समस्या प्रोस्टेट ग्लैंड के बढ़ने की वजह से हो सकती है, जिससे यूरिन के फ्लो में रुकावट आती है.
दवाओं का असर: कुछ खास तरह की दवाओं, खासकर पेन किलर का ज्यादा इस्तेमाल किडनी के काम करने के तरीके पर असर डाल सकता है.

इलाज के तरीके
- इलाज समस्या की असली वजह पर निर्भर करता है.
- सिर्फ डिहाइड्रेशन होने पर, पानी और ऑक्सीजन जैसे जरूरी लिक्विड काफी होते हैं. इन्फेक्शन होने पर, एंटीबायोटिक्स की ज़रूरत पड़ सकती है.
- अगर ब्लॉकेज किडनी स्टोन या प्रोस्टेट की समस्या की वजह से है, तो छोटे मेडिकल प्रोसीजर या सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है.
- शरीर में पानी की सही मात्रा बनाए रखना, बिना वजह दर्द कम करने वाली दवाएँ न लेना और यूरिन से जुड़ी समस्या होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लेना बहुत जरूरी है.
आपको डॉक्टर से तत्काल कब परामर्श लेना चाहिए?
अगर आपको कुछ खास लक्षणों के साथ पेशाब कम आ रहा है, तो आपको बिना देर किए इमरजेंसी वार्ड में संपर्क करना चाहिए
- पेट या पीठ में तेज दर्द
- शरीर, चेहरे और पैरों में बहुत ज्यााद सूजन
- तेज बुखार, पेशाब में खून आना
- सांस लेने में दिक्कत या बिल्कुल भी पेशाब न आना
- ध्यान रहे कि हाई ब्लड प्रेशर (BP) और डायबिटीज (शुगर) से परेशान लोगों में किडनी खराब होने की संभावना ज्यादा होती है. इसलिए, उन्हें हमेशा कंट्रोल में रखना चाहिए
ओलिगुरिया, एनूरिया और पॉल्यूरिया में क्या अंतर है?
ये शब्द आपस में जुड़े हुए हैं और यूरिन प्रोडक्शन के लेवल को बताते हैं. ओलिगुरिया का मतलब है यूरिन का कम निकलना, जबकि एनूरिया का मतलब है यूरिन का बिल्कुल न निकलना. दूसरी ओर, पॉल्यूरिया का मतलब है यूरिन का बहुत ज्यादा बनना.
यूरिन मॉनिटरिंग सदियों से एक मेडिकल प्रैक्टिस रही है. हेल्थकेयर प्रोवाइडर यूरिन के बनने की मात्रा, उसमें मौजूद कोई भी चीज (जैसे खून या प्रोटीन), और यूरिन के रंग का पता लगाता है. यूरिन प्रोडक्शन और उसकी खासियतों को मॉनिटर करके, हेल्थकेयर प्रोवाइडर और मरीज दोनों को सेहत के बारे में जरूरी जानकारी मिल सकती है.


