खूंटी: बिरसा कॉलेज में स्नातक पाठ्यक्रमों की नामांकन क्षमता कम किए जाने का मामला अब जोर पकड़ने लगा है। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) ने सीटों में कटौती का विरोध करते हुए इन्हें पहले की स्थिति में बहाल करने की मांग की है।
कॉलेज में पिछले वर्षों के दौरान लगभग 5 हजार विद्यार्थियों का स्नातक स्तर पर नामांकन होता रहा है। हालांकि, मौजूदा सत्र में सीटों की संख्या घटाकर करीब 2,400 कर दी गई है। अभाविप का कहना है कि इससे विशेष रूप से ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों की उच्च शिक्षा प्रभावित हो सकती है।
विश्वविद्यालय और विभागीय अधिकारियों के सामने उठाया मुद्दा
सोमवार को कॉलेज के निरीक्षण के लिए पहुंचे एचआरडी प्रतिनिधि वरुणा दत्ता, फाइनेंस मैनेजर अजीत कुमार और रांची विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि एवं सीसीडीसी डॉ. विकास कुमार से अभाविप के प्रदेश मंत्री प्रकाश टुटी ने मुलाकात की। उन्होंने अधिकारियों को सीटों में कमी से विद्यार्थियों के सामने पैदा हो रही समस्या की जानकारी दी और नामांकन क्षमता बढ़ाने की मांग रखी।
अधिकारियों की ओर से सीटों की संख्या बढ़ाने को लेकर आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया गया।
ग्रामीण छात्रों के लिए महत्वपूर्ण है बिरसा कॉलेज
अभाविप नेताओं के मुताबिक, बिरसा कॉलेज खूंटी और आसपास के ग्रामीण इलाकों के विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा का अहम केंद्र है। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के अनेक छात्र दूसरे शहरों में जाकर पढ़ाई करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में कॉलेज में सीटों की संख्या कम होने से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के सामने पढ़ाई जारी रखने की चुनौती पैदा हो सकती है।
प्रकाश टुटी ने कहा कि कॉलेज में लंबे समय से करीब 5 हजार विद्यार्थी स्नातक में प्रवेश लेते रहे हैं। ऐसे में सीटों को लगभग आधा कर देना विद्यार्थियों के हित में नहीं है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों से जल्द ठोस फैसला लेने की मांग की।
कॉलेज की दूसरी समस्याओं पर भी चर्चा
अभाविप ने स्नातक सीटों के अलावा कॉलेज में छात्राओं के लिए कॉमन रूम, पर्याप्त रोशनी, आधुनिक कंप्यूटर और कंप्यूटर लैब, बेहतर पुस्तकालय, स्वच्छ शौचालय तथा पेयजल जैसी सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया।
परिषद ने कहा कि वह बातचीत और लोकतांत्रिक तरीके से समस्याओं का समाधान चाहती है। हालांकि, यदि मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की चेतावनी भी दी गई है।
अभाविप ने रांची विश्वविद्यालय, कॉलेज प्रशासन और संबंधित विभाग से क्षेत्र की शैक्षणिक जरूरतों तथा विद्यार्थियों की संख्या को देखते हुए स्नातक की सीटें पर्याप्त रूप से बढ़ाने की मांग की है।
