रांची: खनिज और खनन संशोधन विधेयक के लोकसभा से पारित होने के विरोध में सोमवार को रांची के अल्बर्ट एक्का चौक पर विभिन्न वामपंथी दलों और जन संगठनों ने विरोध सभा आयोजित की। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए और बाद में प्रतिरोध मार्च निकाला गया।
प्रदर्शन में शामिल संगठनों ने विधेयक को झारखंड के खनिज संसाधनों और स्थानीय समुदायों के हितों के लिए नुकसानदायक बताया। वक्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रस्तावित बदलावों से राज्य के प्राकृतिक संसाधनों पर बाहरी नियंत्रण बढ़ सकता है और स्थानीय लोगों के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
विधेयक वापस लेने की मांग
सभा में केंद्र सरकार से खनिज संशोधन विधेयक को वापस लेने की मांग की गई। नेताओं ने कहा कि झारखंड के जल, जंगल, जमीन और खनिज संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर राज्य के लोगों की भागीदारी और अधिकारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि विधेयक वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। कुछ वक्ताओं ने जरूरत पड़ने पर राज्य से खनिजों की ढुलाई रोकने जैसे आंदोलनात्मक कदम उठाने की बात भी कही।
भाजपा के जनप्रतिनिधियों से जवाब मांगने की बात
सभा के दौरान झारखंड से भाजपा के सांसदों, विधायकों और मंत्रियों से भी अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की गई। प्रदर्शनकारियों ने उनसे केंद्र सरकार के सामने झारखंड के हितों से जुड़े मुद्दे उठाने और विधेयक पर पुनर्विचार के लिए दबाव बनाने की अपील की।
वक्ताओं ने कहा कि यदि भाजपा के जनप्रतिनिधि ऐसा नहीं करते हैं तो उनसे राजनीतिक जवाबदेही तय करने की मांग की जाएगी।
कई संगठनों ने लिया हिस्सा
कार्यक्रम में भाकपा, माकपा, भाकपा-माले, एसयूसीआई (कम्युनिस्ट), झारखंड जनाधिकार महासभा, आदिवासी संघर्ष मोर्चा समेत कई संगठनों के कार्यकर्ता शामिल हुए।
सभा को महेंद्र पाठक, मनोज भक्त, प्रफुल्ल लिंडा, मिंटू पासवान, सिराज दत्ता, शुभेंदु सेन और सुदामा खलखो समेत विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने संबोधित किया।
कार्यक्रम के अंत में प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के पुतले जलाकर विधेयक के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। आयोजकों ने आगे भी आंदोलन जारी रखने की बात कही।
