ब्रिजटाउन (बारबाडोस): विश्व क्रिकेट के सर्वकालिक महान खिलाड़ियों में गिने जाने वाले वेस्टइंडीज के पूर्व कप्तान सर गारफील्ड “गैरी” सोबर्स का 89 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके बेटे डेनियल ने उनके निधन की पुष्टि की। सोबर्स के जाने से क्रिकेट जगत ने एक ऐसे दिग्गज को खो दिया, जिसने अपने बहुआयामी खेल से कई पीढ़ियों को प्रेरित किया।
16 साल की उम्र में शुरू हुआ शानदार सफर
1936 में बारबाडोस के ब्रिजटाउन में जन्मे सोबर्स ने महज 16 वर्ष की उम्र में प्रथम श्रेणी क्रिकेट में कदम रखा। इसके अगले ही वर्ष उन्होंने इंग्लैंड के खिलाफ अपना टेस्ट पदार्पण किया और जल्द ही दुनिया के सबसे बेहतरीन ऑलराउंडरों में अपनी पहचान बना ली।
टेस्ट क्रिकेट में शानदार रिकॉर्ड
मार्च 1954 से अप्रैल 1974 तक फैले अपने अंतरराष्ट्रीय करियर में सोबर्स ने 93 टेस्ट मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 57.78 की औसत से 8,032 रन बनाए, जिसमें 26 शतक और 30 अर्धशतक शामिल रहे। गेंदबाजी में भी उन्होंने 235 टेस्ट विकेट अपने नाम किए।
सोबर्स की सबसे बड़ी विशेषता उनकी बहुमुखी गेंदबाजी थी। वह बाएं हाथ से तेज गेंदबाजी करने के साथ-साथ स्पिन की अलग-अलग शैलियों में भी प्रभावी थे। इसके अलावा उनकी फील्डिंग भी बेहतरीन मानी जाती थी। उन्होंने अपने करियर में केवल एक वनडे मैच खेला, जिसमें एक विकेट हासिल किया।
कप्तान के रूप में भी निभाई अहम भूमिका
1965 से 1972 के बीच उन्होंने 39 टेस्ट मैचों में वेस्टइंडीज की कप्तानी की। उनके नेतृत्व में टीम ने 9 मुकाबले जीते, 20 मैच ड्रॉ रहे और 10 में हार का सामना करना पड़ा। वर्ष 1974 में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट को अलविदा कहा।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में भी छोड़ी अमिट छाप
सोबर्स ने बारबाडोस, नॉटिंघमशायर और साउथ ऑस्ट्रेलिया जैसी टीमों का प्रतिनिधित्व करते हुए 383 प्रथम श्रेणी मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 28,314 रन बनाए, जिनमें 86 शतक और 121 अर्धशतक शामिल रहे। गेंदबाजी में उन्होंने 1,043 विकेट लेकर अपनी ऑलराउंड क्षमता का शानदार परिचय दिया।
कई ऐतिहासिक उपलब्धियां उनके नाम
गैरी सोबर्स प्रथम श्रेणी क्रिकेट में एक ओवर में लगातार छह छक्के लगाने वाले पहले बल्लेबाज बने थे। यह उपलब्धि उन्होंने 1968 में नॉटिंघमशायर की ओर से खेलते हुए हासिल की थी।
इसके अलावा 1958 में पाकिस्तान के खिलाफ खेली गई उनकी 365 रन की पारी उस समय टेस्ट क्रिकेट का सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर थी। यह रिकॉर्ड करीब 36 वर्षों तक कायम रहा, जिसे बाद में ब्रायन लारा ने 1994 में तोड़ा।
सम्मान और विरासत
क्रिकेट में असाधारण योगदान के लिए उन्हें 1975 में ब्रिटिश महारानी एलिजाबेथ द्वितीय ने ‘नाइटहुड’ की उपाधि से सम्मानित किया। वर्ष 2000 में उन्हें विजडन द्वारा चुने गए ‘क्रिकेटर ऑफ द सेंचुरी’ की सूची में भी स्थान मिला।
अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (ICC) का वर्ष के सर्वश्रेष्ठ पुरुष क्रिकेटर का प्रतिष्ठित सम्मान भी उनके नाम पर ‘सर गारफील्ड सोबर्स अवॉर्ड’ के रूप में दिया जाता है।
वेस्टइंडीज क्रिकेट के इतिहास में सोबर्स सर्वाधिक रन बनाने वाले खिलाड़ियों की सूची में चौथे और सबसे अधिक विकेट लेने वाले गेंदबाजों में शीर्ष खिलाड़ियों में शामिल हैं। उनकी उपलब्धियां और खेल भावना आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बनी रहेंगी।


