नई दिल्ली, 9 अक्टूबर 2026: भारतीय कंपनियों की कमाई के लिहाज से चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही मजबूत रहने का अनुमान है। घरेलू बाजार में मांग और उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के चलते कंपनियों के कुल राजस्व में सालाना आधार पर 16 से 16.5 प्रतिशत तक वृद्धि हो सकती है। रेटिंग एजेंसी क्रिसिल की रिपोर्ट में यह अनुमान जताया गया है।
करीब 8,000 कंपनियों के आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट
क्रिसिल का यह आकलन 65 से अधिक क्षेत्रों की लगभग 8,000 कंपनियों के आंकड़ों के विश्लेषण पर आधारित है। इसमें बैंकिंग, वित्तीय सेवाओं और तेल-गैस क्षेत्र को शामिल नहीं किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू मांग कॉरपोरेट कमाई को सहारा दे रही है। हालांकि, राजस्व में तेज वृद्धि के बावजूद कंपनियों के ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन में बड़े सुधार की उम्मीद नहीं है।
लागत बढ़ने से मुनाफे पर दबाव
क्रिसिल इंटेलिजेंस के निदेशक सेहुल भट्ट के मुताबिक, दूसरी तिमाही में कंपनियों का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन करीब 18.2 से 18.6 प्रतिशत के दायरे में रह सकता है।
कच्चे तेल और ऊर्जा की कीमतों में बढ़ोतरी से कंपनियों की उत्पादन लागत प्रभावित हुई है। इसके बावजूद कई कंपनियों ने ग्राहकों पर पूरा अतिरिक्त खर्च डालने के बजाय खुद इसका कुछ हिस्सा वहन किया। खासकर उपभोक्ताओं से सीधे जुड़े कारोबार में कीमतों को नियंत्रित रखने की कोशिश की गई, ताकि बिक्री पर प्रतिकूल असर न पड़े।
ऑटोमोबाइल और मेटल कंपनियों का प्रदर्शन मजबूत
दूसरी तिमाही में ऑटोमोबाइल और मेटल क्षेत्र कॉरपोरेट राजस्व की वृद्धि में अहम योगदान दे सकते हैं।
क्रिसिल के अनुमान के मुताबिक:
- पैसेंजर व्हीकल: कार और एसयूवी से जुड़े कारोबार के राजस्व में 24 प्रतिशत वृद्धि।
- कमर्शियल व्हीकल: वाणिज्यिक वाहनों के राजस्व में 21 प्रतिशत बढ़ोतरी।
- एल्युमीनियम: राजस्व में 26 प्रतिशत की वृद्धि।
- स्टील: राजस्व में 12 प्रतिशत की बढ़त।
- बिजली उत्पादन: राजस्व में 23 प्रतिशत उछाल।
मेटल कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों के ऊंचे स्तर से लाभ मिलने का अनुमान है, जबकि वाहन क्षेत्र में मांग राजस्व को बढ़ावा दे रही है।
ग्रामीण बाजार में मांग की रफ्तार धीमी
रिपोर्ट में शहरी और ग्रामीण बाजारों के बीच मांग का अंतर भी सामने आया है। शहरों में कारों और प्रीमियम उत्पादों की मांग अपेक्षाकृत मजबूत रही, जबकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े कुछ क्षेत्रों में वृद्धि की गति धीमी पड़ी।
टू-व्हीलर क्षेत्र के राजस्व की वृद्धि दर पहली तिमाही में 36 प्रतिशत से अधिक थी, जो दूसरी तिमाही में घटकर लगभग 12 प्रतिशत रहने का अनुमान है। ट्रैक्टर क्षेत्र में भी कमजोरी दर्ज की गई है।
ये आंकड़े संकेत देते हैं कि ग्रामीण बाजार में मांग की वापसी अभी समान रूप से नहीं हुई है।
FMCG और रिटेल कारोबार में भी बढ़त
रोजमर्रा के उपभोक्ता उत्पाद बनाने वाली FMCG कंपनियों के राजस्व में 10.5 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है। बढ़ती लागत से निपटने के लिए कुछ कंपनियों ने पैकेट का आकार घटाने की रणनीति अपनाई। इसे ‘श्रिंकफ्लेशन’ कहा जाता है।
इसके अलावा, संगठित रिटेल के राजस्व में 16 प्रतिशत और कंज्यूमर फूड्स क्षेत्र में 14 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान है।
रुपये की कमजोरी से IT सेक्टर को सहारा
आईटी सर्विसेज कंपनियों के राजस्व में रुपये के लिहाज से 12 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान है। डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी से विदेशों से कमाई करने वाली कंपनियों को रुपये में राजस्व दर्ज करने के दौरान फायदा मिल सकता है।
वहीं, मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं के टैरिफ में बढ़ोतरी से दूरसंचार कंपनियों के राजस्व में करीब 10 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया है।
आगे भी मांग और लागत पर रहेगी नजर
क्रिसिल की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियों को घरेलू मांग से समर्थन मिल रहा है, लेकिन बढ़ती उत्पादन लागत और ग्रामीण बाजार में धीमी खपत चुनौतियां बनी हुई हैं।
दूसरी तिमाही के अनुमान बताते हैं कि अलग-अलग क्षेत्रों का प्रदर्शन एक जैसा नहीं है। ऑटोमोबाइल, मेटल और संगठित रिटेल में मजबूत वृद्धि के संकेत हैं, जबकि ग्रामीण मांग से जुड़े कारोबार को अभी और मजबूती की जरूरत है।
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