Saturday, September 12, 2026

केंद्र पर वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर का गंभीर आरोप, बोले- झारखंड के साथ हो रहा भेदभाव.

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रांची: झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र से मिलने वाली राशि और नीतिगत बदलावों के कारण राज्य को लगातार आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। मंत्री ने यह भी सवाल उठाया कि केंद्र की आर्थिक स्थिति कमजोर है या फिर राजनीतिक कारणों से झारखंड को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

केंद्र की नीतियों से 22 हजार करोड़ के नुकसान का दावा

मीडिया से बातचीत में राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि पिछले करीब एक दशक से ग्रांट-इन-एड में कमी देखी जा रही है। उनके अनुसार, विभिन्न केंद्रीय नीतियों और कानूनों में बदलाव के चलते झारखंड को अलग-अलग मदों में आर्थिक नुकसान हुआ है।

वित्त मंत्री के मुताबिक, जी राम जी योजना से राज्य को लगभग 4,000 करोड़ रुपये, एमएमडीआर एक्ट में संशोधन से करीब 14,000 करोड़ रुपये और जीएसटी में बदलाव के कारण लगभग 4,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है। उन्होंने इन आंकड़ों को जोड़ते हुए कहा कि राज्य को कुल करीब 22,000 करोड़ रुपये की क्षति हुई है।

मंत्री ने इसके लिए केंद्र सरकार की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि इसका सीधा असर झारखंड की वित्तीय स्थिति पर पड़ रहा है।

राजस्व बढ़ाने पर राज्य सरकार का जोर

राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि केंद्र से होने वाली कमी की भरपाई के लिए राज्य सरकार अपने स्तर पर राजस्व संग्रह बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने बताया कि अधिकारियों को राजस्व वसूली में तेजी लाने और निर्धारित लक्ष्य से अधिक संग्रह करने के निर्देश दिए गए हैं। विभाग की ओर से इस दिशा में कार्रवाई भी शुरू की गई है। मंत्री ने भरोसा जताया कि नवंबर में होने वाली समीक्षा के दौरान राज्य निर्धारित लक्ष्य के साथ-साथ उससे अधिक राजस्व जुटाने में भी सफल रहेगा।

‘राज्य में हमारी सरकार है, इसलिए आर्थिक रूप से कमजोर करने की कोशिश’

वित्त मंत्री ने केंद्र और राज्य के बीच वित्तीय संबंधों को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि झारखंड का बजट करीब 1.58 लाख करोड़ रुपये का है, जबकि राज्य को लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये टैक्स के रूप में राज्य और केंद्र से प्राप्त होते हैं।

उन्होंने कहा कि राज्य को केंद्र से मिलने वाली वैधानिक राशि समय पर मिलनी चाहिए। उनके मुताबिक, पहले केंद्र और राज्यों के बीच राजनीतिक मतभेद होने के बावजूद आर्थिक हिस्सेदारी को लेकर इस तरह की स्थिति नहीं बनती थी।

केंद्र के रवैये की तुलना की गंभीर स्थिति से

राधाकृष्ण किशोर ने आरोप लगाया कि झारखंड में अलग राजनीतिक दल की सरकार होने के कारण राज्य पर आर्थिक दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने इस स्थिति को समझाने के लिए एक उदाहरण देते हुए कहा कि जैसे किसी भवन में घुसे व्यक्ति को बाहर निकालने के लिए उसकी बिजली और पानी की आपूर्ति रोक दी जाए, उसी तरह राज्य को आर्थिक रूप से दबाव में लाने की सोच लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है।

वित्त मंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच राजनीतिक मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन इसका असर राज्यों के वित्तीय अधिकारों और हिस्सेदारी पर नहीं पड़ना चाहिए।

वाहन और एंबुलेंस खरीद पर भी दी सफाई

गाड़ियों और एंबुलेंस की खरीद में वित्तीय कमी के कारण कथित तौर पर आ रही अड़चन से जुड़े सवाल पर वित्त मंत्री ने आरोपों को खारिज किया।

उन्होंने कहा कि एंबुलेंस खरीद से संबंधित फाइल उनके पास जरूर आई थी, लेकिन उन्होंने उसमें एंबुलेंस चालकों और अन्य आवश्यक सुविधाओं से जुड़े कुछ बिंदुओं पर जानकारी मांगी थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले में उनकी आपत्ति वित्तीय कमी से संबंधित नहीं थी।

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