Friday, May 8, 2026

किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाले 6 हजार रुपये के अलावा राज्य सरकार की ओर से किसानों को 3 हजार रुपये और दिए जाएंगे.

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बिहार विधानसभा चुनावों की गहमागहमी के बीच एक ऐसा ऐलान हुआ है जिसने पूरे राजनीतिक माहौल को हिला दिया है. किसानों को लेकर एनडीए के संकल्प पत्र में किया गया यह वादा अब चर्चा का मुद्दा बन गया है. अगर यह वादा हकीकत में बदल गया, तो बिहार के लाखों किसानों की किस्मत बदल सकती है. लेकिन सवाल यह है की क्या यह घोषणा सिर्फ चुनावी रणनीति है या सच में बदलाव की शुरुआत? चुनाव नजदीक हैं, और अब सबकी नजर इस पर टिकी है कि क्या किसानों को वाकई हर साल 9 हजार रुपये की राहत मिलेगी या यह महज एक सियासी खेल साबित होगा.

बिहार विधानसभा चुनाव का बिगुल बजते ही सियासी हलचल चरम पर है. हर पार्टी मतदाताओं को लुभाने के लिए नए वादों की झड़ी लगा रही है, लेकिन इस बार सबसे ज्यादा चर्चा में किसान हैं. एनडीए ने अपने संकल्प पत्र में किसानों के लिए ऐसा वादा किया है जिसने पूरे चुनावी माहौल को गर्मा दिया है. गठबंधन ने ऐलान किया है कि अगर बिहार में उसकी सरकार बनती है, तो पीएम किसान सम्मान निधि योजना से मिलने वाले 6 हजार रुपये के अलावा राज्य सरकार की ओर से किसानों को 3 हजार रुपये और दिए जाएंगे. यानी बिहार के किसानों को हर साल कुल 9 हजार रुपये की आर्थिक मदद मिलेगी. चुनावी मैदान में यह ऐलान विपक्ष के लिए सीधी चुनौती बनकर सामने आया है.

एनडीए का मास्टरस्ट्रोक क्या है?

बिहार विधानसभा चुनावों की तारीखों के ऐलान के साथ ही सियासी सरगर्मी तेज हो गई है. 243 सीटों पर दो चरणों में चुनाव होंगे और नतीजे 14 नवंबर को आएंगे. इस बीच एनडीए ने अपना संकल्प पत्र जारी करते हुए किसानों को राहत देने वाला बड़ा वादा किया है. गठबंधन का कहना है कि अगर बिहार में उनकी सरकार बनी, तो पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत मिलने वाली रकम के अलावा राज्य सरकार किसानों को 3 हजार रुपये और देगी.

हर साल 9 हजार रुपये क्या किसानों के लिए है गेमचेंजर?

फिलहाल केंद्र की पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल 6 हजार रुपये मिलते हैं, जो तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजे जाते हैं. एनडीए के नए वादे के अनुसार, बिहार सरकार की ओर से 3 हजार रुपये अतिरिक्त दिए जाएंगे. यानी कुल 9 हजार रुपये की सालाना सहायता किसानों को मिलेगी. इससे खेती में निवेश बढ़ेगा और छोटे किसानों को आर्थिक सहायता मिलेगी.

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