Tuesday, May 5, 2026

 किसानों ने खुद बनाया बांध, बचायी रबी फसल की उम्मीद

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प्रखंड मुख्यालय से लगभग 14 किलोमीटर उत्तर स्थित अमैठी व घुरियावां पंचायत के आधा दर्जन गांवों की सिंचाई व्यवस्था हदहदवा बांध क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित हो रही थी.

वजीरगंज. प्रखंड मुख्यालय से लगभग 14 किलोमीटर उत्तर स्थित अमैठी व घुरियावां पंचायत के आधा दर्जन गांवों की सिंचाई व्यवस्था हदहदवा बांध क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित हो रही थी. बांध टूटने के कारण जमा पानी नदी में बह जा रहा था, जिससे रबी फसल को नुकसान की आशंका बढ़ गयी थी. इसे देखते हुए अमैठी पंचायत के पूर्व पैक्स अध्यक्ष आदित्य प्रसाद ने किसानों के सहयोग से अपने संसाधनों पर बांध को दुरुस्त करने का निर्णय लिया. करीब 10 दिनों से जेसीबी व ट्रैक्टर की मदद से 130 फुट लंबा, 70 फुट चौड़ा और 18 फुट ऊंचा बांध बनाया जा रहा है. किसानों का कहना है कि धान व गेहूं की सिंचाई मुख्य रूप से हदहदवा व बबुरैन बांध के सहारे होती है. इन दोनों संसाधनों से अमैठी व घुरियावां पंचायत के सैकड़ों किसानों की हजारों एकड़ भूमि सिंचित होती है.

बांध टूटने से फसल पर संकट मंडरा रहा था

स्थानीय किसान रामबालक प्रसाद, अजय यादव, अर्जुन यादव और बिनोद चौधरी ने कहा कि यदि सरकार पक्का गाइड वॉल, चहका और छिलका का निर्माण कराये, तो हर वर्ष बांध टूटने की समस्या से राहत मिल सकती है. वर्ष 2024–25 में बांध टूटने से रवि फसल पर संकट मंडरा रहा था, लेकिन समय रहते बांध की मरम्मत शुरू होने से अब ओरैल, अमैठी, मदरडीह, सिंघौरा, रामपुर, मचलबिगहा, भरेती, जोधी बिगहा, सेलवे आदि गांवों के किसानों को सिंचाई में सहूलियत मिलेगी.

मंगुरा नदी व बबुरैन बांध की मरम्मत भी की गयी थी

बरसात में जकोहरी व मंगुरा नदी पर बने पूर्वकालीन बांधों के सहारे इस जलाशय में पानी जमा किया जाता है, ताकि पूरे वर्ष सिंचाई हेतु पर्याप्त पानी उपलब्ध रह सके. पूर्व में मंगुरा नदी व बबुरैन बांध की मरम्मत भी की गयी थी. किसानों का कहना है कि कई बार सरकारी पहल की मांग करने के बावजूद उनकी सिंचाई के इस प्रमुख साधन पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें खुद ही बांध की मरम्मत करानी पड़ रही है.

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