नई दिल्ली: किडनी हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह रक्त को साफ करने, शरीर से विषैले पदार्थ और अतिरिक्त तरल बाहर निकालने, इलेक्ट्रोलाइट्स का संतुलन बनाए रखने तथा रक्तचाप को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाती है। जब किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित होने लगती है, तो शरीर कई ऐसे संकेत देने लगता है जिन्हें अक्सर लोग सामान्य समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि किडनी से जुड़ी बीमारियों की शुरुआती पहचान होने पर उपचार अधिक प्रभावी हो सकता है। वहीं, लक्षणों को लंबे समय तक अनदेखा करने से स्थिति गंभीर होकर किडनी फेल होने तक पहुंच सकती है।
किडनी की बीमारी क्यों कहलाती है ‘साइलेंट’ बीमारी?
क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) कई बार शुरुआती चरण में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाती। इसी वजह से बड़ी संख्या में मरीजों को बीमारी का पता तब चलता है, जब किडनी काफी हद तक प्रभावित हो चुकी होती है। डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा और अस्वस्थ जीवनशैली किडनी रोग के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। इसलिए जोखिम वाले लोगों के लिए नियमित स्वास्थ्य जांच महत्वपूर्ण मानी जाती है।
किडनी खराब होने के संभावित शुरुआती संकेत
1. रात में बार-बार पेशाब आना
यदि रात के समय बार-बार उठकर पेशाब करने की जरूरत महसूस हो रही है, तो यह किडनी की कार्यक्षमता में बदलाव का संकेत हो सकता है। हालांकि इसके अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए लगातार समस्या रहने पर डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए।
2. पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन
जब किडनी अतिरिक्त पानी और सोडियम को सही ढंग से बाहर नहीं निकाल पाती, तो शरीर में तरल जमा होने लगता है। इसके कारण पैरों, टखनों, हाथों या चेहरे पर सूजन दिखाई दे सकती है।
3. पेशाब में खून आना
यदि पेशाब का रंग गुलाबी, लाल या भूरे रंग का दिखाई दे या उसमें खून नजर आए, तो इसे कभी भी सामान्य नहीं मानना चाहिए। यह किडनी की पथरी, संक्रमण या किसी गंभीर किडनी रोग का संकेत हो सकता है और तत्काल चिकित्सकीय जांच की जरूरत होती है।
4. झागदार पेशाब
बार-बार अत्यधिक झागदार पेशाब आना इस बात का संकेत हो सकता है कि किडनी प्रोटीन को ठीक से फिल्टर नहीं कर पा रही है। ऐसी स्थिति में चिकित्सकीय जांच कराना उचित रहता है।
5. सांस लेने में परेशानी
किडनी की कार्यक्षमता कम होने पर शरीर में अतिरिक्त तरल जमा हो सकता है, जिसका असर फेफड़ों पर भी पड़ सकता है। यदि बिना किसी स्पष्ट कारण के सांस फूलने या सांस लेने में कठिनाई महसूस हो रही हो, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
6. लगातार थकान और कमजोरी
हर समय थकान महसूस होना, ऊर्जा की कमी रहना या पर्याप्त आराम के बाद भी कमजोरी बने रहना किडनी की समस्या का संकेत हो सकता है। ऐसा शरीर में अपशिष्ट पदार्थों के जमा होने या किडनी से संबंधित एनीमिया के कारण भी हो सकता है।
किन लोगों को अधिक सतर्क रहने की जरूरत है?
- डायबिटीज के मरीज
- हाई ब्लड प्रेशर से पीड़ित लोग
- मोटापे से ग्रस्त व्यक्ति
- परिवार में किडनी रोग का इतिहास
- लंबे समय तक बिना चिकित्सकीय सलाह के दर्द निवारक दवाओं का उपयोग करने वाले लोग
किडनी को स्वस्थ रखने के आसान उपाय
- पर्याप्त मात्रा में साफ पानी पिएं।
- रक्तचाप और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखें।
- संतुलित और कम नमक वाला आहार लें।
- नियमित व्यायाम करें और स्वस्थ वजन बनाए रखें।
- धूम्रपान और अत्यधिक शराब से बचें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के दवाओं का लंबे समय तक सेवन न करें।
- जोखिम होने पर समय-समय पर किडनी की जांच कराएं।
कब तुरंत डॉक्टर से मिलें?
यदि पेशाब में खून आए, शरीर में लगातार सूजन रहे, सांस लेने में कठिनाई हो, पेशाब की आदतों में अचानक बदलाव हो या कई दिनों तक असामान्य थकान महसूस हो, तो बिना देरी किए चिकित्सकीय सलाह लें। समय पर जांच और उपचार से किडनी संबंधी कई गंभीर जटिलताओं से बचाव संभव है।
