Wednesday, September 16, 2026

कल्याण बनर्जी के बयान पर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं आईं, विपक्षी नेताओं ने संवैधानिक प्राधिकार के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा की आलोचना की.

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कोलकाता : तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसद कल्याण बनर्जी ने शुक्रवार को यह टिप्पणी करके एक राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया कि अगर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार संवैधानिक पद पर नहीं होते, तो वह उनकी ‘‘उंगली काट देते’’. उन्होंने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग के प्रमुख ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ बहुत खराब व्यवहार किया.

तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता व सांसद कल्याण बनर्जी ने यह टिप्पणी निर्वाचन आयोग के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटर लिस्ट से कथित तौर पर मनमाने तरीके से नाम हटाए जाने के विरोध में राज्य में टीएमसी द्वारा कोलकाता में आयोजित एक रैली में समर्थकों को संबोधित करते हुए की.

कल्याण बनर्जी ने पिछले महीने सीईसी और मुख्यमंत्री के बीच हुई कथित बातचीत का ज़िक्र किया, जब ममता बनर्जी उनसे मिलने और एसआईआर के खिलाफ विरोध जताने के लिए नई दिल्ली गई थीं. उन्होंने कहा, “सीईसी ने उनके साथ बहुत बुरा बर्ताव किया.” उन्होंने सीएम पर उंगली उठाने की हिम्मत की. अगर वे सीईसी नहीं होते, तो मैं उसी दिन उनकी उंगली काट देता.”

कल्याण बनर्जी के इस बयान पर राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं आईं, विपक्षी नेताओं ने संवैधानिक प्राधिकार के खिलाफ इस्तेमाल की गई भाषा की आलोचना की.

भाजपा के नेता प्रतिपक्ष शुभेंदु अधिकारी ने कहा, ‘‘ये टिप्पणी तृणमूल कांग्रेस की मानसिकता को दर्शाती हैं, जिसे लोकतंत्र या संवैधानिक संस्थाओं का कोई सम्मान नहीं है.”

गत 28 फरवरी को जारी आधिकारिक आंकड़े के अनुसार, पिछले साल नवंबर में एसआईआर प्रक्रिया शुरू होने के बाद से लगभग 63.66 लाख नाम – यानी लगभग 8.3 प्रतिशत मतदाता – हटा दिए गए हैं, जिससे मतदाताओं की संख्या लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ से कुछ अधिक रह गई है.

अभिषेक बनर्जी ने बीजेपी के बहिष्कार की अपील की
इस बीच, तृणमूल कांग्रेस के ऑल-इंडिया जनरल सेक्रेटरी अभिषेक बनर्जी ने भाजपा के पूरे बॉयकॉट की अपील की. ​​”पहले कहा जाता था ‘भाजपा को वोट नहीं’. लेकिन अभी के हालात में, यह सिर्फ़ वोट न देना नहीं है, बल्कि भाजपा का पूरा बॉयकॉट है.”

अभिषेक ने मज़ाक में कहा, “एसआईआर के नाम पर आम लोगों पर जो अमानवीय ज़ुल्म हो रहे हैं, उन्हें शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता. जब लोग अपने अधिकार खोने के डर में जी रहे हैं, तब भाजपा लोगों की तकलीफ़ की चिंता किए बिना रथ यात्रा निकालकर राजनीतिक फ़ायदा उठाने की कोशिश कर रही है.”

बनर्जी ने खुली चुनौती दी, “मैं धर्मतला के इस मंच से खुली चुनौती दे रही हूं, वे (BJP) अगले चुनाव में 50 सीटें भी पार नहीं कर पाएंगे. बंगाल के लोग उस अवर्णनीय दुख और मानसिक पीड़ा का कड़ा जवाब देंगे, जिसे बंगाल के आम लोगों को एसआईआर प्रक्रिया से गुजरने के लिए मजबूर किया गया है.”

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