भारतीय शेयर बाजार में लगातार दो कारोबारी सत्रों की गिरावट बुधवार को थम गई। एफएमसीजी, रियल्टी और सरकारी बैंकों के शेयरों में खरीदारी से घरेलू बाजार को मजबूती मिली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के ब्याज दर संबंधी फैसले से पहले कच्चे तेल की कीमतों में नरमी ने भी निवेशकों के sentiment को सहारा दिया।
सेंसेक्स और निफ्टी दोनों बढ़त के साथ बंद
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 332.63 अंक यानी 0.45 प्रतिशत की बढ़त के साथ 74,336.45 पर बंद हुआ। इसी तरह एनएसई का निफ्टी 50 भी 99 अंक यानी 0.43 प्रतिशत चढ़कर 23,217.60 के स्तर पर पहुंच गया।
बाजार ने दिन के निचले स्तरों से रिकवरी की और चुनिंदा बड़े शेयरों में खरीदारी देखने को मिली।
निफ्टी के लिए 23,300-23,400 अहम स्तर
तकनीकी संकेतों के लिहाज से निफ्टी के लिए 23,300 से 23,400 का स्तर ऊपर की ओर महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, इस दायरे के ऊपर मजबूती मिलने पर रिकवरी को आगे बढ़ने का आधार मिल सकता है। वहीं व्यापक तकनीकी स्थिति में सुधार के लिए निफ्टी का 23,500 के ऊपर टिकना अहम होगा।
नीचे की तरफ 23,100-23,070 का क्षेत्र तत्काल सपोर्ट के तौर पर देखा जा रहा है। यदि इंडेक्स 23,070 के नीचे जाता है, तो दबाव बढ़ सकता है और निफ्टी के 23,000 से 22,800 के क्षेत्र तक जाने की संभावना बन सकती है।
HDFC Life, ITC और SBI Life में खरीदारी
निफ्टी के प्रमुख शेयरों में HDFC Life Insurance, ITC और SBI Life Insurance बढ़त वाले प्रमुख शेयरों में रहे। इन कंपनियों में खरीदारी से बेंचमार्क इंडेक्स को सहारा मिला।
हालांकि, व्यापक बाजार में तेजी का असर ज्यादा मजबूत नहीं रहा। निफ्टी मिडकैप इंडेक्स 0.01 प्रतिशत और निफ्टी स्मॉलकैप इंडेक्स 0.18 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए।
सेक्टोरल प्रदर्शन की बात करें तो निफ्टी आईटी और निफ्टी फार्मा पर दबाव बना रहा और दोनों सूचकांकों में दिन की प्रमुख गिरावट दर्ज की गई।
फेड के फैसले पर बाजार की नजर
अब निवेशकों का ध्यान अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैठक के नतीजे और आगे की ब्याज दर नीति के संकेतों पर है। बाजार विश्लेषकों के मुताबिक, फेड चेयरमैन की संतुलित टिप्पणी से घरेलू बाजार में बनी रिकवरी को सहारा मिल सकता है।
इसके विपरीत, अगर अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में दोबारा तेजी आती है या ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंचती हैं, तो भारतीय शेयर बाजार पर फिर से दबाव देखने को मिल सकता है।
ऐसे में आने वाले कारोबारी सत्रों में वैश्विक संकेतों, कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी मौद्रिक नीति से जुड़े संकेत बाजार की दिशा तय करने में अहम रहेंगे।
