नई दिल्ली | 31 अक्टूबर 2026 | Bharat Superfast News
केंद्र सरकार ने देश के कपड़ा उद्योग को राहत देते हुए कपास (कॉटन) के आयात पर मिलने वाली कस्टम ड्यूटी छूट की अवधि दो महीने के लिए बढ़ा दी है। अब यह छूट 31 दिसंबर 2026 तक लागू रहेगी। इससे पहले यह सुविधा 31 अक्टूबर 2026 तक ही निर्धारित थी।
सरकार के इस फैसले का उद्देश्य घरेलू बाजार में कपास की उपलब्धता बनाए रखना और कपड़ा निर्माताओं को जरूरी कच्चा माल उपलब्ध कराना है।
कपड़ा मंत्रालय ने जारी किया आधिकारिक बयान
कपड़ा मंत्रालय ने शनिवार को जारी बयान में कस्टम ड्यूटी छूट की अवधि बढ़ाने की जानकारी दी। मंत्रालय के अनुसार, इस कदम से भारतीय कपड़ा मिलों को विशेष और बेहतर गुणवत्ता वाले कपास की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलेगी।
कपास की उपलब्धता बेहतर होने से कपड़ा उत्पादन की लागत पर दबाव कम करने में सहायता मिल सकती है। इस फैसले से विशेष रूप से छोटे और मझोले उद्योगों (MSMEs) को लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय कपड़ा उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को भी मजबूती मिल सकती है।
अगस्त में कपड़ा निर्यात में 16.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में भारत के कपड़ा निर्यात में पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में 16.1 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। इस दौरान निर्यात का कुल मूल्य 29,776 करोड़ रुपये रहा।
वहीं, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच देश का कुल कपड़ा निर्यात 1.43 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह पिछले वर्ष की इसी अवधि के मुकाबले 10.3 प्रतिशत अधिक है।
अगस्त महीने में कॉटन यार्न, फैब्रिक और हैंडलूम उत्पादों के निर्यात में भी 24.1 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
India-EU व्यापार समझौते से भी उम्मीदें
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच व्यापार समझौते को भी कपड़ा उद्योग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। खबर में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इस समझौते के लागू होने पर भारत के 90.7 प्रतिशत निर्यात को यूरोपीय बाजार में शुल्क-मुक्त प्रवेश मिलने का प्रावधान है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कच्चे माल की उपलब्धता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नए अवसर भारतीय कपड़ा उद्योग के विस्तार में सहायक हो सकते हैं।
रोजगार और निर्यात बढ़ाने पर सरकार का जोर
कपास आयात पर कस्टम ड्यूटी छूट बढ़ाने के फैसले से कपड़ा उद्योग को कच्चे माल की आपूर्ति बनाए रखने में मदद मिलने की उम्मीद है। सरकार का जोर टेक्सटाइल क्षेत्र में उत्पादन, रोजगार और निर्यात को बढ़ावा देने पर है।
अब उद्योग की नजर इस बात पर रहेगी कि दिसंबर तक बढ़ाई गई छूट से कपास की उपलब्धता और उत्पादन लागत पर कितना प्रभाव पड़ता है।
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