रांचीः इस वर्ष शिक्षक दिवस के अवसर पर राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित करेगी. झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद (JEPC) सभागार में 5 सितंबर को आयोजित होने वाले राज्य स्तरीय समारोह में कुल 128 शिक्षकों को शॉल, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा.
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग शिक्षकों के सतत पेशेवर विकास पर लगातार जोर दे रहा है. इसके तहत 50 घंटे का अनिवार्य समेकित सतत व्यावसायिक विकास कार्यक्रम (CCPD) संचालित है. इस कार्यक्रम में मॉड्यूल लेखन, डिजिटल मॉड्यूल तैयार करने और आवासीय व गैर-आवासीय प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने वाले शिक्षकों को इस बार सम्मान देने का निर्णय लिया गया है. परिषद का मानना है कि इन शिक्षकों ने न सिर्फ शिक्षा प्रणाली को मजबूत किया, बल्कि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर को ऊंचा उठाने में भी अहम योगदान दिया.

राष्ट्रीय स्तर पर अनुशंसित दो शिक्षक
इस कार्यक्रम में दो शिक्षकों को विशेष सम्मानित किया जाएगा जिन्हें इस वर्ष राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार के लिए अनुशंसा प्राप्त हुई है. इसमें रामगढ़ जिला के मनुवा स्थित पीएमश्री उच्च विद्यालय के सहायक शिक्षक सुरेंद्र प्रसाद गुप्ता और चतरा जिला के उत्क्रमित +2 उच्च विद्यालय, दवारी के सहायक शिक्षक मनोज कुमार चौबे शामिल हैं. इन दोनों शिक्षकों को 25 हजार रुपये की सम्मान राशि, शॉल, स्मृति चिन्ह और प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा.

झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद का कहना है कि यह सम्मान समारोह शिक्षकों को प्रोत्साहित करने और उनकी मेहनत को समाज के सामने लाने का एक प्रयास है. परिषद का मानना है कि सतत पेशेवर विकास केवल एक प्रशिक्षण प्रक्रिया नहीं है बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की दिशा में शिक्षक और सरकार की साझा जिम्मेदारी का हिस्सा है.

परिषद के वरिष्ठ अधिकारी धीरसेन सोरेंग ने कहा कि शिक्षक समाज की रीढ़ हैं, उनके बिना शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव नहीं है. यह सम्मान उन शिक्षकों के लिए है जिन्होंने नई शिक्षण विधियों को अपनाकर न सिर्फ खुद को अद्यतन किया, बल्कि बच्चों को भी बेहतर सीखने का माहौल उपलब्ध कराया.

इस कार्यक्रम में राज्य स्तर के अधिकारी, शिक्षाविद् और विभिन्न जिलों से आए चयनित शिक्षक शामिल होंगे. परिषद की ओर से बताया गया कि शिक्षकों की सूची पहले ही जारी कर दी गई है और सभी को आमंत्रण पत्र भेजे गए हैं. समारोह को गरिमामय ढंग से संपन्न कराने के लिए पूरी तैयारी कर ली गई है.

राज्य सरकार का मानना है कि इस प्रकार के कार्यक्रमों से शिक्षकों में आत्मविश्वास और पेशेवर दक्षता दोनों बढ़ते हैं. इससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता का अंतर कम होगा. परिषद का कहना है कि आने वाले समय में और अधिक शिक्षकों को इस प्रशिक्षण और सम्मान की श्रृंखला से जोड़ा जाएगा ताकि पूरे राज्य में शिक्षण व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाया जा सके.


