रांची: झारखंड विधानसभा के पुराने सभागार में शुक्रवार को ‘साइबर सिक्योरिटी एंड AI अवेयरनेस वर्कशॉप’ का आयोजन किया गया. कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो शामिल हुए. वर्कशॉप का आयोजन ‘द एशिया फाउंडेशन’ बाल कल्याण संघ और साइबर पीस फाउंडेशन की ओर से किया गया. इसमें साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा प्राइवेसी और डिजिटल सेफ्टी जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों ने विस्तार से जानकारी दी.
- कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने बताया कि AI के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध का स्वरूप तेजी से बदल रहा है. ठग नए-नए हथकंडे अपनाकर लोगों को आर्थिक नुकसान पहुंचा रहे हैं. वर्कशॉप में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि बदलते साइबर खतरों को कैसे समझा जाए, डेटा प्राइवेसी को कैसे सुरक्षित रखा जाए और एक सुरक्षित डिजिटल इकोसिस्टम कैसे विकसित किया जाए. साथ ही साइबर सुरक्षा को मजबूत बनाने में AI की भूमिका पर भी विस्तार से चर्चा हुई.
- द एशिया फाउंडेशन की कंट्री हेड नंदिता बरुआ ने साइबर थ्रेट की बारीकियों को समझाते हुए कहा कि डिजिटल दुनिया में सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है. उन्होंने लोगों को साइबर अपराध से बचने के लिए जागरूक रहने और डिजिटल सुरक्षा के नियमों का पालन करने की सलाह दी.
- कार्यक्रम के समापन पर विधानसभा अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने कहा कि आज के समय में इस तरह की जागरूकता कार्यशालाएं बेहद जरूरी हैं. थोड़ी सी लापरवाही लोगों की मेहनत की कमाई को पलभर में खत्म कर सकती है. उन्होंने कहा कि आए दिन लोग साइबर फ्रॉड का शिकार हो रहे हैं, इसलिए हर भारतीय को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक होना चाहिए.
- विधानसभा अध्यक्ष ने इस दौरान एक महत्वपूर्ण टिप्पणी भी की. उन्होंने कहा कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर आयोजित इस वर्कशॉप में विधानसभा सदस्यों की भागीदारी बेहद कम रही, जो चिंता का विषय है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में जनप्रतिनिधि ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेंगे.
- राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने कहा कि शायद ही कोई ऐसा परिवार होगा जो किसी न किसी रूप में साइबर अपराध से प्रभावित न हुआ हो. उन्होंने कहा कि अपराधी फर्जी वीडियो कॉल, डिजिटल ब्लैकमेल, रंगदारी और चुनाव के दौरान AI के जरिए फर्जी वीडियो बनाकर लोगों की छवि खराब करने जैसे हथकंडे अपना रहे हैं. उन्होंने केंद्र सरकार से साइबर अपराध के खिलाफ और अधिक सख्त कानून बनाने की मांग करते हुए कहा कि ऐसा कानून होना चाहिए जिससे एक बार पकड़ा गया अपराधी दोबारा इस तरह का अपराध करने की हिम्मत न कर सके.
कक्षा 8 से साइबर सुरक्षा पढ़ाने का सुझाव
विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि रोजमर्रा की जिंदगी में छोटी-छोटी लापरवाहियां लोगों को साइबर ठगी का शिकार बना देती हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि कक्षा 8 से ही स्कूलों के पाठ्यक्रम में साइबर सिक्योरिटी और AI पर एक अध्याय शामिल किया जाना चाहिए, ताकि बच्चे शुरुआत से ही डिजिटल सुरक्षा के प्रति जागरूक बन सके.


