बिहार के बोधगया में टी स्टॉल चलाने वाली पूजा चायवाली के सामने बड़े-बड़े पढ़ाकु घुटने टेक देंगे.
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गया: पूजा कहती हैं “कोई भी काम बेकार नहीं होता है. शुरुआत में शर्म आई लेकिन फिर चाय बेचने का काम भी बड़ा लगने लगा. अब चाय बेचने में भी अच्छा लगता है. tea stall के चलते कई विदेशियों से पहचान है. विदेशी युवती-महिलाएं फ्रेंड हैं.” दुकान पर देसी से ज्यादा विदेशी ग्राहकों की भीड़ लगती है.
भाषाओं का विद्वान: बिहार में कभी ग्रेजुएट चायवाली, आत्मनिर्भर चायवाली, बीसीए चायवाली, सिंगर चायवाली की चर्चा खूब रही. इसबार एक ऐसी चायवाली से मिलवाने जा रहा हूं, जिसके सामने बड़े-बड़े पढ़ाकु फेल हैं. हम बात कर रहे हैं बोधगया में चाय दुकान चलाने वाली पूजा कुमारी के बारे में, जो ना सिर्फ पढ़ी लिखी है बल्कि कई भाषाओं का विद्वान भी है.
गया के मोहनपुर थाना के मझौली बनकट गांव की रहने वाली पूजा 25 साल की है. साल 2014 में इसकी शादी बोधगया के रहने वाले उपेंद्र कुमार से हुई. उपेंद्र कुमार मजदूर हैं और दिन का 400 से 500 कमा लेते हैं. इससे परिवार का गुजारा मुश्किल था साल 2023 में पूजा बोधगया आ गयी और चाय दुकान खोल ली. अब दोनों की कमाई से परिवार चलता है और उसकी पढ़ाई भी होती है.
9वीं कक्षा में हो गयी थी शादी: पूजा बताती हैं कि जब उसकी शादी हुई थी उस वक्त 9वीं कक्षा में थी. पढ़ाई में अच्छी थी तो पति उसे पढ़ाने लगा. पूजा पहले मैट्रिक, इंटर, स्नातक फिर एमए कर चुकी है. अब आगे पीएचडी कर प्रोफेशर बनने का सपना पाले चाय दुकान चला रही है.
इतना जानने के बाद तो मन में सवाल जरूर उठ रहा होगा कि इतना पढ़ने के बाद भी चाय दुकान क्यों चला रही है? कोई अच्छी सी नौकरी कर सकती थी? दरअसल, ये बात सच है और पूजा प्रोफेशर भी बनना चाह रही है लेकिन परिवार की जिम्मेदारी के कारण यह काम भी नहीं छोड़ रही और अब तो उसे इस काम से गर्व होने लगा है.

बात ही पढ़ाई की तो आज इसी बदौलत पूजा भारत आए विदेशी मेहमानों के बीच फेमस हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि पूजा फर्राटेदार अंग्रेजी, जापानी, चीनी, थाई, अमेरिकन भाषा की एक्सपर्ट है. दुकान पर आए विदेशी ग्राहक से उनकी अपनी भाषा में आसानी से बात कर लेती है.
“मगध विश्वविद्यालय से एमए की डिग्री प्राप्त की है. थाई, वियतनाम, जर्मनी, चीनी, जापानी, अमेरिकन समेत कई देशों के भाषा को समझ है. बोधगया में रहते हुए ही धीरे-धीरे आम बोलचाल करते-करते सीखा. देश के कई राज्यों की भाषाओं की भी समझ है.” -पूजा, चाय दुकानदार
विदेशी मेहमानों से दोस्ती: पूजा की इस कला से विदेशी मेहमान खुद को सहज महसूस करते हैं. पूजा बताती हैं कि एमए करने के बाद वह अंग्रेजी और हिंदी में पहले से अच्छी थी. बोधगया में ही किराए के मकान में रहकर पढ़ाई कर रही थी. बोधगया में विदेशी मेहमानों के आने जाने का सिलसिला चलते रहता है. ऐसे में उसे कई महिलाओं से दोस्ती हुई और कई भाषाओं की जानकारी भी हो गयी.

दुकानों पर विदेशी मेहमानों की भीड़: दरअसल, विभिन्न देशों से आए मेहमानों को भाषा को लेकर काफी समस्या होती है. हिन्दी वे समझते नहीं है और अंग्रेजी बोलने वालों की संख्या कम रहती है. ऐसे में पूजा ने इस समस्या को समझते हुए भाषा को अपना हथियार बना ली और चाय दुकान खोल ली. इसके बाद से पूजा की चाय दुकानों पर विदेशी मेहमानों की भीड़ लगी रहती है.
चाय ऐसी की तबीयत खुश हो जाए: पूजा की चाय दुकान पर जापानी पर्यटक एकी यामाडा पहुंची. यामाडा पूजा से जापानी में बात की और चाय ऑर्डर किया. 20 रुपए की एक चाय पीते हुए एकी यामाडा कहती है कि ‘पूजा की चाय लाजवाब होती है.’

एकी को पसंद आयी चाय: एकी यामाडा अक्सर आती है. कहती है कि पूजा विदेशी भाषाओं की समझ रखती है. विदेशियों से बात कर चाय आराम से बीच लेती है. एक दूसरे से दोनों बातचीत भी करते हैं. पूजा और एक ही यामाडा बातचीत के दौरान खुश होकर एक दूसरे को गले भी लगा लेते हैं.
बच्चों को भी सिखाती विदेशी भाषा: कई भाषाओं का ज्ञान का लाभ अगल-बगल के दुकानदार भी लेते हैं. ऐसे दुकानदार जिन्हें अंग्रेजी या अन्य विदेशी भाषाएं नहीं बोलनी आती उन्हें पूजा मदद करती है. इस तरह पूजा चाय दुकान खोलकर अपनी एक अच्छी पहचान बनाई है. पूजा के दो बच्चे भी हैं जो पढ़ने के लिए स्कूल जाते हैं. पूजा उन्हें भी अलग-अलग भाषा सिखाती हैं.

चाय दुकान की खासियत: पूजा की दुकान में 10 और 20 रुपये वाली चाय मिलती है. 20 वाली चाय विदेशियों को खूब भाती है. पूजा बताती है कि महीने के 10 हजार से अधिक सिर्फ चाय से आमदनी हो जाती है. इसके अलावे अन्य सामानों को बेचने से भी कमाई हो जाती है.


