Saturday, July 18, 2026

देवघर भूमि विवाद: हाईकोर्ट से बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट को राहत, राज्य सरकार और PMCH की अपीलें खारिज.

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रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने देवघर से जुड़े एक महत्वपूर्ण भूमि विवाद में बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट (BBMT) के पक्ष में फैसला सुनाते हुए राज्य सरकार और परित्राण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (PMCH) द्वारा दायर अपीलों को खारिज कर दिया है। हालांकि, मेडिकल कॉलेज के लिए Essentiality Certificate (आवश्यकता प्रमाणपत्र) जारी करने के संबंध में एकलपीठ के आदेश में आंशिक संशोधन किया गया है।

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि म्यूटेशन (नामांतरण) की प्रक्रिया केवल राजस्व रिकॉर्ड के रखरखाव और कर वसूली से संबंधित होती है। राजस्व अधिकारियों को किसी भूमि के स्वामित्व (टाइटल) पर निर्णय देने का अधिकार नहीं है।

सार्वजनिक नीलामी में खरीदी गई थी जमीन

मामले के अनुसार, बाबा बैद्यनाथ मेडिकल ट्रस्ट ने बैंक द्वारा आयोजित सार्वजनिक नीलामी के माध्यम से परित्राण मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल की संबंधित भूमि खरीदी थी। इसके बाद ट्रस्ट ने अपने नाम से नामांतरण कराने के लिए आवेदन दिया, लेकिन देवघर के अंचल अधिकारी ने इसे अस्वीकार कर दिया।

बाद में हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अंचल अधिकारी के आदेश को निरस्त करते हुए ट्रस्ट के पक्ष में म्यूटेशन करने का निर्देश दिया था। इसी आदेश को चुनौती देते हुए राज्य सरकार और अन्य पक्षों ने खंडपीठ में अपील दायर की थी।

नीलामी प्रक्रिया पहले ही न्यायिक जांच में सही ठहराई जा चुकी

सुनवाई के दौरान खंडपीठ ने कहा कि संबंधित भूमि को पीएमसीएच ने स्वयं बैंक के पास ऋण के लिए गिरवी रखा था। ऋण का भुगतान नहीं होने पर बैंक ने कानूनी प्रक्रिया के तहत सार्वजनिक नीलामी की।

अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि नीलामी प्रक्रिया को चुनौती देने के प्रयास पहले विभिन्न न्यायिक मंचों, जिनमें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी शामिल हैं, में सफल नहीं हुए। ऐसे में बिक्री प्रमाणपत्र (Sale Certificate) प्रभावी और वैध माना जाएगा।

बाद में नए आधार जोड़कर आदेश का बचाव नहीं किया जा सकता

खंडपीठ ने कहा कि किसी प्रशासनिक आदेश को अदालत में सही ठहराने के लिए बाद में नए कारण नहीं जोड़े जा सकते, यदि वे मूल आदेश में दर्ज नहीं थे। इस संदर्भ में अदालत ने Mohinder Singh Gill मामले में स्थापित कानूनी सिद्धांत का उल्लेख किया।

अदालत ने यह भी कहा कि नामांतरण की प्रक्रिया का उद्देश्य केवल राजस्व अभिलेखों को अद्यतन करना है, न कि संपत्ति के स्वामित्व का विवाद सुलझाना।

Essentiality Certificate पर तय समय में होगा निर्णय

Essentiality Certificate के मुद्दे पर अदालत ने एकलपीठ के आदेश में संशोधन करते हुए निर्देश दिया कि देवघर के उपायुक्त चार सप्ताह के भीतर भूमि का सत्यापन पूरा करें। इसके बाद संबंधित सक्षम प्राधिकारी छह सप्ताह के भीतर कानून के अनुरूप आवेदन पर अंतिम निर्णय लें।

खंडपीठ ने यह भी स्पष्ट किया कि सत्यापन के दौरान सभी आवश्यक तथ्यों पर निष्पक्ष रूप से विचार किया जाए और आवेदन को असंगत या अप्रासंगिक कारणों के आधार पर अस्वीकार न किया जाए।

अदालत ने राज्य सरकार के रुख पर जताई टिप्पणी

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जिस भूमि का नामांतरण पहले पीएमसीएच के पक्ष में किया जा चुका था, उसी संपत्ति की वैध नीलामी के बाद खरीदार के नामांतरण का विरोध करना उचित नहीं माना जा सकता। अदालत ने संकेत दिया कि वैध नीलामी से संपत्ति प्राप्त करने वाले खरीदार को उसके अधिकारों से वंचित नहीं किया जाना चाहिए।

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