Tuesday, April 28, 2026

सूरत के इनोवेटर शिवम मौर्य ने एक रिमोट-कंट्रोल्ड ‘Ghost Cycle’ बनाई है, जिसमें रोबोटिक पैर लगे हैं, जो अपने आप पैडल मारते हैं.

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सूरत: हाल ही में गुजरात के शहर सूरत की सड़कों पर एक अनोखा नज़ारा देखने को मिला, जहां रोबोटिक पैरों की एक जोड़ी बिना किसी शारीरिक मदद के एक ट्राई-साइकिल चला रही थी, जिसकी वजह से इसे ‘Ghost Cycle’ नाम दिया गया.

यह नज़ारा असल में सूरत के एक इनोवेटर, शिवम मौर्य का बनाया हुआ एक इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट है. शिवम इससे पहले भी तब सुर्खियों में आए थे, जब उन्होंने ‘डार्क नाइट बैटपॉड’ और ‘ट्रॉन’ मोटरसाइकिल से प्रेरित होकर, बिल्कुल शुरू से एक इलेक्ट्रिक मोटरसाइकिल ‘गरुड़ बाइक’ बनाई थी.

शिवम मौर्य का लेटेस्ट प्रोजेक्ट, ‘Ghost Cycle’, उनके पिछले ड्राइवर-रहित साइकिल प्रोजेक्ट पर ही आधारित है. इसमें उन्होंने साइकिल के पुर्जों को त्रिकोणीय फ्रेम से हटाकर एक खोखले मैनिकिन (पुतले) के पैरों में लगा दिया है, जिससे ऐसा प्रतीत होता है, मानो कोई सिर और धड़-रहित व्यक्ति इस वाहन की सवारी कर रहा हो.

A young innovator from Surat has created a unique bicycle

ETV Bharat से बात करते हुए, मौर्य ने बताया कि यह साइकिल सामने वाले व्हील्स में लगी मोटर से चलती है. जैसे-जैसे गाड़ी आगे बढ़ती है, पीछे के दोनों व्हील्स भी घूमते हैं, जिससे ड्राइवचेन पैडल और उससे जुड़े पुतले के पैरों को हिलाती है.

यह एक आम साइकिल के काम करने के तरीके से बिल्कुल उल्टा है, जिसमें पैडल मारने से गति मिलती है, क्योंकि ड्राइवचेन पीछे के पहियों को आगे धकेलती है. जब साइकिल को सड़क पर परीक्षण के लिए बाहर निकाला गया, तो बच्चे और पैदल चलने वाले लोग एक खाली साइकिल को अपने आप पैडल मारते देख हैरान रह गए.

पूरे ‘Ghost Cycle’ प्रोजेक्ट पर मौर्य और उनके पार्टनर गुरप्रीत अरोड़ा के कुल 35,000 रुपये खर्च हुए और इसे पूरा करने में उन्हें तीन महीने की लगातार कड़ी मेहनत करनी पड़ी. इस साइकिल को किसी भी बैटरी से चलने वाले खिलौने की तरह ही, रिमोट कंट्रोल या मोबाइल ऐप के ज़रिए कंट्रोल किया जा सकता है.

A young innovator from Surat has created a unique bicycle

हालांकि, मौर्य का कहना है कि इस साइकिल को एक पहले से तय रास्ते पर भी चलाया जा सकता है, खास तौर पर, ऐसे रास्ते पर जिसे कोडिंग के ज़रिए तय किया गया हो. शिवम मौर्य के नाम पर ऐसे ही कई मज़ेदार इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स हैं, जिनमें एक रोबोटिक रिक्शा भी शामिल है.

वह अपने YouTube चैनल ‘Creative Science’ पर अपने इनोवेशन के बारे में पोस्ट करते हैं और पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझाते हैं. इस चैनल के अभी 20 लाख से ज़्यादा सब्सक्राइबर हैं. मौर्य का मानना ​​है कि इस टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल भविष्य के स्मार्ट शहरों में डिलीवरी सेवाओं और सुरक्षा गश्त के लिए वरदान साबित हो सकता है.

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