रांची: मैट्रिक-इंटर का रिजल्ट आने के बाद उच्च शिक्षा के लिए दाखिला प्रक्रिया शुरू होते ही छात्र-छात्राओं की चिंता बढ़ गई है. इंजीनियरिंग, मेडिकल, लॉ समेत विभिन्न कोर्सेस में एडमिशन लेने वाले विद्यार्थी आर्थिक बोझ से परेशान हैं. इस समस्या को दूर करने के लिए झारखंड सरकार की महत्वाकांक्षी गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना पर छात्रों की उम्मीदें टिकी हैं, लेकिन बैंकों की उदासीनता के कारण योजना धीमी गति से आगे बढ़ रही है.
योजना का उद्देश्य और प्रावधान
हेमंत सोरेन सरकार द्वारा शुरू की गई इस योजना के तहत राज्य के 10वीं और 12वीं पास विद्यार्थियों को उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के लिए 15 लाख रुपये तक का ऋण रियायती ब्याज दर पर उपलब्ध कराया जाता है. उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग द्वारा संचालित इस स्कीम का मकसद आर्थिक रूप से कमजोर छात्रों को बिना किसी परेशानी के अच्छे कॉलेजों में दाखिला दिलाना है.
बीजेपी और कांग्रेस नेता के बयान (ETV Bharat)
आंकड़े बताते हैं सच्चाई
विभागीय आंकड़ों के अनुसार, योजना शुरू होने के बाद अब तक 6083 आवेदन बैंकों को प्राप्त हुए हैं. इनमें से मात्र 2647 आवेदन स्वीकृत हुए, जबकि 1955 विद्यार्थियों को ही वास्तव में ऋण राशि स्वीकृत हुई है.
- कुल स्वीकृत राशि: 238.04 करोड़ रुपये
- कुल वितरित राशि: 63.87 करोड़ रुपये
राजकीय सहायता के रूप में अब तक 37,50,016 रुपये जारी किए गए हैं.
बैंकों का प्रदर्शन, बैंकों के रवैये में काफी असमानता दिख रही है.
बैंकों की उदासीनता पर सवाल
विभागीय सूत्रों और विधानसभा की बैठक में बार-बार इस मुद्दे को उठाया जा चुका है, फिर भी बैंकों की लापरवाही जारी है. छात्रों का कहना है कि एडमिशन की अंतिम तिथियां नजदीक आ रही हैं, लेकिन लोन स्वीकृति में हो रही देरी उनके भविष्य को प्रभावित कर रही है.
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
भारतीय जनता पार्टी ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि यह योजना भी अन्य योजनाओं की तरह फ्लॉप साबित हो रही है. भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अजय साह ने आरोप लगाया कि वित्त विभाग के आंतरिक आदेश के कारण बैंक जानबूझकर लोन स्वीकृत नहीं कर रहे हैं. उन्होंने इसे राज्य सरकार की “सोची-समझी साजिश” बताया
कांग्रेस ने किया बचाव
सत्तारूढ़ कांग्रेस ने केंद्र सरकार और भाजपा पर पलटवार किया है. कांग्रेस महासचिव राकेश सिन्हा ने कहा कि यह राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना है, लेकिन केंद्र की साजिश और राजनीतिक दखल के कारण बैंक उदासीन रवैया अपना रहे हैं. उन्होंने युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाया.
छात्रों की अपील
विद्यार्थी संगठन अब जल्द से जल्द सभी लंबित आवेदनों को स्वीकृत करने और राशि वितरित करने की मांग कर रहे हैं, ताकि नए सत्र में किसी भी योग्य छात्र को आर्थिक संकट का सामना न करना पड़े. सरकार और बैंकों के बीच बेहतर समन्वय की कमी इस योजना की सफलता में सबसे बड़ी बाधा बनकर उभरी है.


