बक्सर में राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-319 ए के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण में तेजी लाने के लिए शिविर लगाए जा रहे हैं। इन शिविरों में रैयतों से आवेदन लिए जाएंगे कागजातों की जांच होगी और मुआवजा भी दिया जाएगा। शिविर विभिन्न पंचायतों और कार्यकारी एजेंसी परिसरों में आयोजित किए जाएंगे। अधिकारियों को आवश्यक व्यवस्था करने के निर्देश दिए गए हैं।
बक्सर। राष्ट्रीय उच्च पथ संख्या-319 ए (मोहनिया-रामगढ़ चौसा-बक्सर) के निर्माण के लिए भू-अर्जन हेतु हितबद्ध रैयतों से आवेदन पत्र प्राप्ति में तीव्रता लाने के लिए शिविर का आयोजन किया जा रहा है।
हितबद्ध रैयतों से विहित प्रपत्र में वांछित सभी कागजातों के साथ आवेदन प्राप्त करने की प्रक्रिया शनिवार से शुरू कर दी गई। इसके तहत अंचल पैकेज-2 अंतर्गत अहिरौली, पांडेयपट्टी एवं अन्य मौजा के लिए पांडेयपट्टी पंचायत भवन निर्धारित किया गया है। वहां 28 जुलाई तक आवेदन लिए जाएंगे।
इसके बाद 29 जुलाई से 30 जुलाई तक चौसा अंचल पैकेज-2 अंतर्गत मौजा सिकरौल के लिए कार्यकारी एजेंसी एनएच- 319 ए सिकरौल कैंप परिसर निर्धारित किया गया है।
वहीं, 31 जुलाई से एक अगस्त तक चौसा अंचल पैकेज-2 अंतर्गत मौजा पवनी के लिए पवनी पंचायत भवन, दो अगस्त से चार अगस्त तक चौसा अंचल पैकेज-2 अंतर्गत मौजा चुन्नी के लिए माध्यमिक विद्यालय चुन्नी, पांच अगस्त से छह अगस्त तक चौसा अंचल पैकेज-एक अंतर्गत मौजा तिवाय के लिए कार्यकारी एजेंसी एनएच 319-ए तिवाय कैंप परिसर निर्धारित किया गया है।
मिलेगा मुआवजा
इस दौरान कैंप स्थल पर हितबद्ध रैयतों से आवेदन प्राप्त किया जाएगा। साथ ही, प्राप्त आवेदनों की जांच एवं मुआवजा भुगतान की कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए विभिन्न पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है।
आवेदन पत्र से संबंधित सभी प्रपत्र कैंप में पर्याप्त मात्रा में रखने की कार्रवाई जिला भू-अर्जन कार्यालय को करने के लिए कहा गया है। कागजातों की जांच अंचल अधिकारी बक्सर एवं चौसा अपने अंचल निरीक्षक, संबंधित हल्का कर्मचारी एवं अमीन के साथ उपस्थित रहेंगे, ताकि आवेदन पत्रों की जांच कैंप स्थल पर ही की जा सके।
संबंधित हल्का कर्मचारी अपने साथ राजस्व अभिलेख अवश्य रखेगें। विधि व्यवस्था को कैंप स्थल पर काफी संख्या में हितबद्ध रैयतों के आने की संभावना को देखते हुए थानाध्यक्ष मुफस्सिल को कैंप स्थल पर पुलिस बल की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है। अंचल अधिकारी बक्सर एवं चौसा को इसके प्रचार-प्रसार के लिए भी कहा गया है।


