Friday, September 25, 2026

रांची हिंसा मामले में पांच दोषियों को दो-दो साल की सजा, कोर्ट ने लगाया जुर्माना.

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रांची: 10 जून 2022 को रांची में हुए हिंसक जुलूस और उपद्रव से जुड़े डेली मार्केट थाना कांड संख्या 16/2022 में अदालत ने पांच आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी-24, रांची की अदालत में न्यायिक दंडाधिकारी रितविका सिंह ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए सभी दोषियों को अधिकतम दो वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई।

दोषियों में मो. उस्मान उर्फ करण, मो. तवारू उर्फ तबारक कुरैशी, मो. सरफराज आलम, मो. साबिर अंसारी और मो. अफसर शामिल हैं।

इन धाराओं में दोषसिद्धि

अदालत ने पांचों को आईपीसी की धारा 147, 353/149, 504/149 और 120बी के तहत दोषी माना। हालांकि, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने के कारण धारा 148 और 341/149 के आरोपों से सभी को बरी कर दिया गया।

अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, 10 जून 2022 को करीब 8 से 10 हजार लोगों के एक जुलूस के एकरा मस्जिद से फिरायालाल चौक की ओर बढ़ने की सूचना पुलिस को मिली थी। अभियोजन के मुताबिक, जुलूस के लिए पूर्व अनुमति नहीं ली गई थी। पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से भीड़ को रोकने और वापस लौटने के लिए कहा था।

अभियोजन पक्ष का कहना था कि इसके बावजूद जुलूस आगे बढ़ा और पुलिसकर्मियों के साथ धक्का-मुक्की, गाली-गलौज तथा पथराव की स्थिति उत्पन्न हुई।

10 गवाहों के बयान हुए दर्ज

मामले में पुलिस की ओर से 10 गवाहों को सूचीबद्ध किया गया था। इनमें पुलिस अधिकारी और पुलिसकर्मी शामिल थे। रिकॉर्ड के मुताबिक, दो गवाहों को अदालत में होस्टाइल विटनेस घोषित किया गया।

अभियोजन पक्ष की गवाही 15 जुलाई 2026 को पूरी हुई थी। इसके बाद 10 अगस्त 2026 को आरोपियों के बयान दर्ज किए गए।

पुलिसकर्मियों पर पथराव का भी उल्लेख

अदालत में पेश गवाहों ने जुलूस के दौरान पुलिस बल के साथ धक्का-मुक्की और पथराव की बात कही। एक गवाह ने एक पुलिसकर्मी के पैर में गोली लगने और अन्य पुलिसकर्मियों के पत्थर लगने से घायल होने का बयान दिया।

डेली मार्केट थाना प्रभारी रह चुके एक गवाह ने भी अदालत में अपने सिर पर पत्थर लगने और अस्पताल में इलाज कराने की बात कही।

कुछ आरोपों में नहीं मिली पर्याप्त पुष्टि

अदालत ने अपने निष्कर्ष में माना कि अभियोजन यह साबित करने में सफल रहा कि आरोपी बिना अनुमति निकाले गए जुलूस में शामिल थे और पुलिस की रोकने की कोशिश के बावजूद जुलूस आगे बढ़ा।

हालांकि, अदालत के अनुसार भीड़ के पास किस प्रकार के घातक हथियार थे, इसे अभियोजन पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर सका। इसी वजह से धारा 148 के तहत आरोप सिद्ध नहीं हुआ। धारा 341/149 के आरोप से भी आरोपियों को बरी किया गया।

हर आरोपी पर 13 हजार रुपये तक का जुर्माना

सजा के तहत धारा 147 में दो साल की कैद और 3,000 रुपये जुर्माना, धारा 353/149 में दो साल की कैद और 3,000 रुपये, तथा धारा 504/149 में दो साल की कैद और 3,000 रुपये जुर्माना लगाया गया है। वहीं धारा 120बी के तहत छह महीने की सजा और 1,000 रुपये जुर्माने का आदेश दिया गया।

इस तरह प्रत्येक दोषी पर कुल 13 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं चुकाने पर अतिरिक्त 30 दिन का साधारण कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी, इसलिए प्रभावी सजा की अवधि दो वर्ष रहेगी।

अदालत ने पहले से जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का निर्देश भी दिया है। साथ ही दोषियों को प्रोबेशन का लाभ देने से इनकार कर दिया गया। सजा तय करते समय अदालत ने मामले की प्रकृति, जुलूस में शामिल लोगों की संख्या, पुलिसकर्मियों के साथ हुए व्यवहार और केस डायरी में दर्ज पूर्व आपराधिक मामलों से संबंधित विवरण का उल्लेख किया।

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