रांची। राजधानी रांची में पब्लिक स्कूल एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन (पासवा) की ओर से शिक्षक सम्मान समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा व्यवस्था, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और युवाओं के रोजगार जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों को समारोह के दौरान सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह रहे। उन्होंने शिक्षकों की भूमिका को समाज निर्माण की बुनियाद बताते हुए कहा कि शिक्षक केवल विद्यार्थियों को पढ़ाने का काम नहीं करते, बल्कि आने वाली पीढ़ी के नागरिकों को तैयार करते हैं।
शिक्षकों की भूमिका पर अपर मुख्य सचिव ने दिया जोर
अजय कुमार सिंह ने कहा कि किसी शिक्षण संस्थान की पहचान केवल उसकी इमारत से नहीं होती। वहां के शिक्षक और विद्यार्थी ही उस संस्थान की वास्तविक ताकत होते हैं।
उन्होंने अपने जीवन में शिक्षकों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी सफलता में गुरुजनों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय समाज में शिक्षकों को लंबे समय से मार्गदर्शक और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाला माना गया है।
मजबूत शिक्षा व्यवस्था से होता है विकास
अपर मुख्य सचिव ने शिक्षा के बुनियादी ढांचे को राज्य के विकास से जोड़ते हुए कहा कि जिन क्षेत्रों ने दशकों पहले उच्च शिक्षा और तकनीकी संस्थानों पर निवेश किया, वहां आज विकास के बेहतर अवसर दिखाई देते हैं।
उन्होंने झारखंड के कुछ प्रमुख शिक्षण संस्थानों का उदाहरण देते हुए कहा कि इन संस्थानों ने राज्य की शैक्षणिक और विकास यात्रा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
उनके अनुसार राज्य सरकार शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि झारखंड के कुछ स्कूलों की शैक्षणिक गुणवत्ता की तुलना देश के अच्छे स्कूलों से होने लगी है। ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी कई चुनौतियां हैं, लेकिन मुख्यमंत्री स्कूल ऑफ एक्सीलेंस जैसी पहल के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को व्यापक स्तर तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
शिक्षकों को नई तकनीक अपनाने की सलाह
अजय कुमार सिंह ने शिक्षकों से बदलती तकनीक के साथ खुद को अपडेट करने की अपील की। उन्होंने सुझाव दिया कि दूरदराज के इलाकों में रहने वाले विद्यार्थियों तक अच्छे शिक्षकों की पढ़ाई और व्याख्यान ऑनलाइन माध्यम से पहुंचाए जा सकते हैं।
उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को शिक्षा के क्षेत्र में उपयोगी तकनीक बताते हुए कहा कि इसका इस्तेमाल एक सहायक उपकरण के रूप में किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि तकनीक शिक्षक की भूमिका का विकल्प नहीं हो सकती।
Gen-Z को समझना शिक्षकों के लिए चुनौती
अपर मुख्य सचिव ने कहा कि वर्तमान दौर में शिक्षकों के सामने नई पीढ़ी की सोच और चुनौतियों को समझना भी एक महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। विद्यार्थियों के साथ बेहतर संवाद स्थापित करके उन्हें सही दिशा देना जरूरी है।
उन्होंने शिक्षा को रोजगार और उद्योग की जरूरतों से जोड़ने पर भी जोर दिया। उनका कहना था कि विद्यार्थियों को केवल नौकरी पाने की तैयारी कराने के बजाय उनमें ऐसा कौशल विकसित किया जाना चाहिए, जिससे वे भविष्य में रोजगार के अवसर पैदा करने में भी सक्षम बनें।
डीजी रेल ने साझा किए स्कूल के अनुभव
समारोह के विशिष्ट अतिथि डीजी रेल अनिल पालटा ने अपने स्कूली दिनों की यादें साझा कीं और शिक्षकों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए शिक्षकों की डांट-फटकार भी उनके हित और बेहतर भविष्य की भावना से होती है।
विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए सांस्कृतिक कार्यक्रम
कार्यक्रम के दौरान विभिन्न स्कूलों से पहुंचे विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। रंगारंग कार्यक्रमों ने समारोह में मौजूद लोगों का मनोरंजन किया और कार्यक्रम का माहौल उत्साहपूर्ण बना दिया।
समारोह के अंत में शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले शिक्षकों को सम्मानित किया गया।
