Thursday, May 21, 2026

मिडिल ईस्ट तनाव के बीच पीएम मोदी के यूएई दौरे से भारत ने 30 मिलियन बैरल तेल और पांच अरब डॉलर निवेश का समझौता किया.

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की हालिया यात्रा भारत के लिए बेहद रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण साबित हुई है. अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण वैश्विक तेल बाजार में जारी अस्थिरता के बीच दोनों देशों ने कई ऐतिहासिक ऊर्जा समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. पीएम मोदी के पांच देशों (यूएई, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली) के दौरे का यह पहला पड़ाव था.

रणनीतिक विशेषज्ञों के अनुसार, यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब मिडिल ईस्ट में अनिश्चितता का माहौल है और भारत अपनी दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित करने का प्रयास कर रहा है. यह दौरा यूएई द्वारा पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (OPEC) से बाहर निकलने के ऐतिहासिक फैसले के ठीक बाद हुआ है, जिसने खाड़ी क्षेत्र के ऊर्जा परिदृश्य को पूरी तरह बदल दिया है. ओपेक का छठा सबसे बड़ा उत्पादक होने के नाते, यूएई अब उत्पादन कोटे से मुक्त है और अपनी क्षमता को 4.8 मिलियन बैरल प्रति दिन से अधिक बढ़ा सकता है. भारत, जो अपनी कच्चे तेल की जरूरतों का लगभग 10% यूएई से आयात करता है, को यूएई की इस उत्पादन स्वतंत्रता का सीधा लाभ मिलेगा.

मुख्य समझौते और रणनीतिक कदम

30 मिलियन बैरल क्रूड रिजर्व
इंडियन स्ट्रैटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व्स लिमिटेड’ और यूएई की ‘ए़डनॉक’ (ADNOC) के बीच समझौता हुआ है. इसके तहत यूएई भारत के रणनीतिक पेट्रोलियम रिजर्व में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाकर 30 मिलियन बैरल करेगा.

एलपीजी आपूर्ति
सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन और एडनॉक ने दीर्घकालिक एलपीजी (रसोई गैस) आपूर्ति के लिए समझौता किया है.

रणनीतिक गैस रिजर्व
दोनों देश भविष्य की सुरक्षा के लिए भारत में रणनीतिक गैस रिजर्व स्थापित करने की संभावनाओं पर भी काम करेंगे.

$5 बिलियन का निवेश
द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने के लिए यूएई ने भारत में 5 अरब डॉलर (लगभग ₹41,000 करोड़ से अधिक) के नए निवेश की प्रतिबद्धता जताई है.

यह समझौता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हाल ही में संघर्ष विराम के बावजूद रविवार को यूएई और सऊदी अरब के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर नए ड्रोन हमले हुए हैं, जिसने खाड़ी देशों की संवेदनशीलता को बढ़ा दिया है. विशेषज्ञों का मानना है कि रूस के बाद अब यूएई के साथ मजबूत होते यह संबंध भारत को भविष्य के किसी भी वैश्विक तेल संकट या आपूर्ति में रुकावट से पूरी तरह सुरक्षित रखेंगे.

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