Sunday, September 27, 2026

बिहार में 11 खाद्य नमूने जांच में फेल, हल्दी-पनीर से लड्डू तक में मिली अनियमितता.

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पटना: बिहार में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता को लेकर खाद्य संरक्षा विभाग की जांच में 11 नमूने निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे हैं। अलग-अलग जिलों से लिए गए इन नमूनों की प्रयोगशाला जांच में कई खाद्य पदार्थों में प्रतिबंधित या बाहरी रंग, रसायन और मानक से कम गुणवत्ता जैसी गड़बड़ियां सामने आई हैं।

स्वास्थ्य सचिव सह खाद्य संरक्षा आयुक्त कुमार रवि ने खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम, 2006 के तहत इन मामलों में अभियोजन की मंजूरी दे दी है। संबंधित अधिकारियों को सक्षम न्यायालय में मामले दर्ज कराने का निर्देश दिया गया है।

किन खाद्य पदार्थों में मिली गड़बड़ी?

जांच में सामने आए मामलों में हल्दी पाउडर, बेसन लड्डू, भिंडी, खाद्य तेल, रोल बर्फी, धनिया पाउडर, सौंफ और पनीर शामिल हैं।

  • अररिया: हल्दी पाउडर के नमूने में मेटानिल येलो पाया गया। इसी जिले के धनिया पाउडर में ऑयल सॉल्युबल कलर और स्टार्च की मौजूदगी मिली।
  • शेखपुरा: बेसन लड्डू के नमूने में मेटानिल येलो पाया गया।
  • भोजपुर: हल्दी पाउडर के नमूने में लेड क्रोमेट मिला।
  • जमुई: बेसन लड्डू में भी मेटानिल येलो की पुष्टि हुई।
  • पूर्णिया: भिंडी के नमूने में बाहरी या अतिरिक्त रंग की मौजूदगी पाई गई।
  • सीतामढ़ी: मल्टी-सोर्स एडिबल वेजिटेबल ऑयल में निर्धारित सीमा से अधिक एसिड वैल्यू और तेल में घुलनशील सिंथेटिक रंग मिला।
  • मुजफ्फरपुर: रोल बर्फी में चांदी के वर्क की जगह एल्युमिनियम फॉइल पाए जाने की पुष्टि हुई।
  • पटना: दानापुर के एक प्रतिष्ठान से लिए गए हल्दी पाउडर में लेड क्रोमेट मिला। वहीं गुलजारबाग से लिए गए सौंफ के नमूने में फास्ट ग्रीन एफसीएफ पाया गया।
  • खगड़िया: पनीर के नमूने में फार्मेलिन और स्टार्च मिला। साथ ही इसमें निर्धारित मानक की तुलना में वसा की मात्रा कम पाई गई।

अब कोर्ट में चलेगा मामला

खाद्य संरक्षा विभाग ने इन मामलों में कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। संबंधित अधिकारियों को सक्षम न्यायालय में अभियोजन दायर करने का निर्देश दिया गया है।

विभाग के अनुसार, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए नमूनों की जांच और मानकों का उल्लंघन पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।

दोष सिद्ध होने पर सजा का प्रावधान

विभाग के मुताबिक, संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत दोष सिद्ध होने पर तीन महीने तक की जेल और तीन लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। अंतिम कानूनी कार्रवाई और सजा का निर्णय सक्षम न्यायालय की प्रक्रिया के बाद होगा।

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