Thursday, October 15, 2026

बिहार ग्रामीण बैंक की वित्तीय सेहत सुधारने की तैयारी, घाटे वाली शाखाओं और एनपीए पर रहेगा फोकस.

Share

पटना, 15 अक्टूबर 2026: बिहार ग्रामीण बैंक की वित्तीय स्थिति और कामकाज में सुधार के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) ने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं। बिहार ग्रामीण बैंक समेत छह क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों की समीक्षा में ऋण वसूली बढ़ाने, एनपीए घटाने, पूंजी की स्थिति मजबूत करने और घाटे में चल रही शाखाओं के नेटवर्क को तर्कसंगत बनाने पर जोर दिया गया है।

समीक्षा का उद्देश्य बैंकों की वित्तीय सेहत सुधारने के साथ उनकी परिचालन क्षमता और दीर्घकालिक स्थिरता को मजबूत करना है। हालांकि, अलग-अलग बैंकों के लिए सुधार के उपाय उनकी वित्तीय स्थिति और परिचालन जरूरतों के अनुसार अलग हो सकते हैं।

घाटे वाली शाखाओं की समीक्षा पर जोर

बिहार ग्रामीण बैंक के लिए सुझाए गए सुधारों में घाटे में चल रही शाखाओं की समीक्षा, ऋण वसूली में सुधार और परिसंपत्तियों की गुणवत्ता बेहतर करना शामिल है। इसके साथ ही बैंक की पूंजीगत स्थिति मजबूत करने और निगरानी व्यवस्था को प्रभावी बनाने पर भी ध्यान देने की बात कही गई है।

शाखाओं के नेटवर्क को तर्कसंगत बनाने का उद्देश्य परिचालन लागत कम करना और संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना है। हालांकि, शाखाओं को बंद करने के संबंध में किसी अंतिम निर्णय की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं की गई है।

कर्मचारियों की कमी और तकनीकी सीमाएं बड़ी चुनौती

ऑल इंडिया ग्रामीण बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय महासचिव डीएन त्रिवेदी के अनुसार, बिहार ग्रामीण बैंक के सामने कर्मचारियों की कमी और तकनीकी व्यवस्था की सीमाएं प्रमुख चुनौतियां हैं।

उन्होंने कहा कि रिक्त पदों को भरने के लिए मित्रा समिति की सिफारिशों के अनुरूप कदम उठाने की जरूरत है। कर्मचारियों की कमी से शाखाओं के दैनिक कामकाज, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, ग्रामीण क्षेत्रों तक बैंकिंग सेवाएं पहुंचाने और व्यावसायिक लक्ष्यों को पूरा करने पर असर पड़ सकता है।

एनपीए घटाने में डिजिटल निगरानी की भूमिका

बैंक के फंसे हुए कर्ज यानी गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) को कम करने के लिए ऋण खातों की नियमित निगरानी और समय पर वसूली जरूरी मानी जा रही है।

इसके लिए ऐप आधारित निगरानी प्रणाली विकसित करने का सुझाव दिया गया है। ऐसी व्यवस्था से बकाया खातों पर नजर रखने, ग्राहकों से संपर्क करने, वसूली की समय-सारणी तैयार करने और भुगतान की प्रगति का आकलन करने में मदद मिल सकती है।

तकनीकी व्यवस्था में सुधार से बैंक के कर्मचारियों का काम आसान होने के साथ परिचालन दक्षता बढ़ाने की भी संभावना है।

प्रतिस्पर्धी ऋण दरों और खुदरा ऋण पर ध्यान

बैंक की आय और व्यावसायिक प्रदर्शन में सुधार के लिए प्रतिस्पर्धी ब्याज दरों पर ऋण उपलब्ध कराने तथा बेहतर प्रतिफल वाले खुदरा ऋणों का विस्तार करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही ऋण की गुणवत्ता और जोखिम प्रबंधन से समझौता नहीं करने पर भी जोर है।

ग्राहकों तक बैंक के उत्पादों और योजनाओं की जानकारी पहुंचाने के लिए प्रचार-प्रसार को प्रभावी बनाने की जरूरत बताई गई है। इससे नए ग्राहकों को जोड़ने और शुद्ध ब्याज मार्जिन में सुधार करने में मदद मिल सकती है।

83,082 करोड़ रुपये का कुल कारोबार

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, बिहार ग्रामीण बैंक का कुल कारोबार 83,082 करोड़ रुपये है। इसमें 50,377 करोड़ रुपये की जमा राशि और 32,705 करोड़ रुपये का ऋण शामिल है।

दिए गए विवरण के मुताबिक, बैंक ने चालू वर्ष में 505.90 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया है। बैंक के पास 2,104 शाखाओं और 26 क्षेत्रीय कार्यालयों का नेटवर्क है तथा यह 3.50 करोड़ से अधिक ग्राहकों को सेवाएं देता है।

रिपोर्ट में बैंक की बाजार हिस्सेदारी 27 प्रतिशत बताई गई है। इन आंकड़ों से बैंक के बड़े परिचालन नेटवर्क का पता चलता है, जबकि समीक्षा में लागत नियंत्रण, ऋण वसूली और तकनीकी क्षमता सुधारने पर भी जोर दिया गया है।

ग्रामीण ग्राहकों को बेहतर सेवा देने की चुनौती

बिहार ग्रामीण बैंक का ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ा नेटवर्क है। ऐसे में वित्तीय सुधार के साथ यह सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण होगा कि ग्रामीण ग्राहकों, किसानों और सरकारी योजनाओं के लाभार्थियों को बैंकिंग सेवाएं आसानी से मिलती रहें।

कर्मचारियों की उपलब्धता, डिजिटल सुविधाओं का विस्तार, ऋण वसूली और शाखाओं के संचालन में सुधार बैंक की आगे की रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्से हो सकते हैं। शाखाओं के नेटवर्क में किसी भी बदलाव को लागू करने से पहले स्थानीय जरूरतों और ग्राहकों की पहुंच पर पड़ने वाले प्रभाव का आकलन भी अहम होगा।

BHARATSUPERFASTNEWS

Read more

Local News