पटना, 15 अक्टूबर 2026: बिहार में बकरीपालन को संगठित और व्यावसायिक रूप देने की दिशा में पहल की गई है। बिहार राज्य बकरीपालक सहकारी परिसंघ लिमिटेड (गोट फेडरेशन) के कार्यालय का बुधवार को विधिवत उद्घाटन किया गया। इस पहल का उद्देश्य बकरीपालकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना, उनकी आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है।
गोट फेडरेशन का कार्यालय पटना स्थित पशुपालन निदेशालय की इमारत के प्रथम तल पर स्थापित किया गया है। इसके माध्यम से राज्य के बकरीपालकों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ने और उनके व्यवसाय को आगे बढ़ाने की दिशा में काम किया जाएगा।
गोट बैंक और पशु मार्ट शुरू करने की योजना
गोट फेडरेशन के अध्यक्ष और डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि बकरीपालन ग्रामीण परिवारों की आजीविका का महत्वपूर्ण साधन है। खासकर छोटे एवं सीमांत किसानों और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए यह आय का एक उपयोगी माध्यम है।
उन्होंने बताया कि सहकारिता आधारित व्यवस्था के जरिए बकरीपालकों की आर्थिक स्थिति बेहतर बनाने का प्रयास किया जाएगा। इसके तहत गोट बैंक, पशु मार्ट और मीट कियोस्क संचालित करने की योजना है। इसके अलावा गोट रियरिंग फार्म स्थापित करने पर भी काम किया जाएगा।
इन पहलों से बकरीपालकों को पशुपालन के बेहतर प्रबंधन, पशुओं की उपलब्धता और उत्पादों के विपणन में मदद मिलने की उम्मीद है।
छोटे और सीमांत किसानों को मिलेगा लाभ
बकरीपालन कम संसाधनों वाले ग्रामीण परिवारों के लिए आजीविका का एक महत्वपूर्ण विकल्प है। इसे संगठित स्वरूप मिलने से पशुपालकों को अपने व्यवसाय के विस्तार और बाजार तक पहुंच बनाने में सहायता मिल सकती है।
गोट फेडरेशन के माध्यम से बकरीपालकों को एक साझा मंच उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है, ताकि वे सहकारी व्यवस्था के जरिए अपनी जरूरतों और व्यावसायिक चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सकें।
बकरीपालकों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर जोर
फेडरेशन के प्रबंध निदेशक सुभाष नारायण ने संस्था को प्रभावी और जनोपयोगी बनाने की प्रतिबद्धता जताई। उन्होंने कहा कि फेडरेशन की गतिविधियों का लाभ वास्तविक बकरीपालकों तक पहुंचाना प्राथमिकता होगी।
कार्यक्रम में पशुपालन निदेशक श्रीकांत शास्त्री सहित विभाग के अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की पहल
बिहार में गोट फेडरेशन की स्थापना को बकरीपालन क्षेत्र को संगठित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। प्रस्तावित गोट बैंक, पशु मार्ट, मीट कियोस्क और गोट रियरिंग फार्म जैसी गतिविधियों के जरिए बकरीपालकों को बेहतर बाजार सुविधाएं उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।
हालांकि, इन योजनाओं के वास्तविक प्रभाव का आकलन इनके क्रियान्वयन, उपलब्ध सुविधाओं और ग्रामीण पशुपालकों तक पहुंच के आधार पर किया जा सकेगा।
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