नई दिल्ली: देश में ईंधन की पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखने और वैश्विक संकट के बीच घरेलू हितों की रक्षा के लिए केंद्र सरकार ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है. सरकार ने डीजल और विमान ईंधन (ATF) के निर्यात पर लगने वाले शुल्क में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. राजस्व विभाग द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, संशोधित दरें मंगलवार से पूरे देश में प्रभावी हो गई हैं.
इस नए बदलाव के तहत अब डीजल के निर्यात पर ₹14 प्रति लीटर और हवाई ईंधन (एटीएफ) के निर्यात पर ₹12.5 प्रति लीटर का शुल्क लागू होगा. हालांकि, सरकार ने घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देते हुए पेट्रोल के निर्यात शुल्क और स्थानीय बाजार में बिकने वाले पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में कोई बदलाव नहीं किया है. इसका सीधा मतलब यह है कि देश के आम नागरिकों के लिए पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों पर कोई असर नहीं पड़ेगा.

हर पखवाड़े होती है समीक्षा
सरकार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की औसतन कीमतों और रिफाइनिंग मार्जिन के आधार पर हर 15 दिन में इन दरों की समीक्षा करती है. इससे पहले 1 जून को दरों में संशोधन किया गया था. पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और संकट को देखते हुए, सरकार ने देश के भीतर पेट्रोलियम पदार्थों की कमी को रोकने और अत्यधिक निर्यात को हतोत्साहित करने के लिए विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क और सड़क व बुनियादी ढांचा उपकर लगाने की व्यवस्था को मजबूत किया है.
देश में ईंधन का पर्याप्त भंडार, घबराने की जरूरत नहीं
पेट्रोलियम मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि भारत में पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और प्राकृतिक गैस का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है. पेट्रोलियम मंत्रालय की संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने एक अंतर-मंत्रालयी प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि देश की सभी रिफाइनरियां पूरी क्षमता के साथ काम कर रही हैं और कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है. उन्होंने जनता और उद्योगों से ऊर्जा का जिम्मेदारी से उपयोग करने और संरक्षण पर ध्यान देने की अपील की है.
खुदरा पंपों पर भीड़ घटाने के लिए नए नियम
मंत्रालय के अनुसार, समस्या ईंधन की आपूर्ति में नहीं, बल्कि खपत के बदलते पैटर्न में है. मई के दौरान, लगभग 420 मिलियन लीटर डीजल की बिक्री, जो आमतौर पर थोक या सीधे उपभोक्ता पंपों के जरिए होती थी, वह अचानक खुदरा पेट्रोल पंपों पर स्थानांतरित हो गई. इस वजह से कुछ क्षेत्रों में खुदरा पंपों पर भारी दबाव और भीड़ देखी गई.
इस स्थिति को नियंत्रित करने और आम जनता को असुविधा से बचाने के लिए सरकार ने डीजल की बिक्री पर अस्थायी रूप से 200 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की सीमा तय कर दी है. इसके साथ ही बड़े औद्योगिक और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं को निर्देश दिया गया है कि वे खुदरा आउटलेट्स पर दबाव बनाने के बजाय अपने निजी उपभोक्ता पंपों से ही डीजल की खरीदारी करें. यह व्यवस्था लगभग 90 दिनों के लिए अस्थायी रूप से लागू की गई है.


