Friday, September 25, 2026

त्योहारों से पहले बढ़ी सोने-चांदी की कीमत, MCX पर दोनों धातुओं में तेजी.

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नई दिल्ली: त्योहारी खरीदारी शुरू होने से पहले सोने और चांदी के दाम में तेजी देखने को मिली है। शुक्रवार, 25 सितंबर को घरेलू वायदा बाजार में दोनों कीमती धातुओं ने बढ़त दर्ज की। वैश्विक मांग, स्थानीय बाजार में खरीदारी और नए सौदों के चलते कीमतों को मजबूती मिली है। ऐसे में निवेशकों के साथ-साथ सोने-चांदी की खरीदारी की तैयारी कर रहे लोगों की नजर बाजार के ताजा भाव पर है।

MCX पर सोना हुआ महंगा

मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना 150 रुपये यानी 0.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,50,860 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया।

बाजार विश्लेषकों के अनुसार, स्थानीय ज्वेलर्स की ओर से हाजिर बाजार में मजबूत मांग और बाजार प्रतिभागियों द्वारा नई पोजीशन बनाए जाने से सोने को समर्थन मिला। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी सोने की कीमत में मामूली तेजी रही। न्यूयॉर्क में सोना वायदा 0.01 प्रतिशत बढ़कर 4,275.38 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रहा था।

चांदी 2.33 लाख रुपये के पार

औद्योगिक मांग और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सकारात्मक रुख के बीच चांदी की कीमत में भी तेजी रही। MCX पर दिसंबर डिलीवरी वाला चांदी वायदा 368 रुपये यानी 0.16 प्रतिशत बढ़कर 2,33,850 रुपये प्रति किलोग्राम हो गया।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में चांदी वायदा भी 0.02 प्रतिशत की मामूली बढ़त के साथ 63.80 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर कारोबार करता देखा गया।

प्रमुख शहरों में सोने के खुदरा भाव

इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश के प्रमुख शहरों में 24 कैरेट और 22 कैरेट सोने के खुदरा भाव अलग-अलग स्तर पर रहे। स्थानीय बाजार में कीमतें शहर, ज्वेलर्स और अन्य शुल्क के आधार पर अलग हो सकती हैं।

बैंक हड़ताल का भी बाजार पर असर

बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक आने वाले दिनों में बैंकिंग गतिविधियों में संभावित व्यवधान भी हाजिर कारोबार को प्रभावित कर सकता है। 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित तीन दिवसीय देशव्यापी बैंक हड़ताल के अलावा सप्ताहांत को मिलाकर बैंक शाखाओं और फिजिकल चेक क्लियरिंग पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।

ऐसे माहौल में बड़े ज्वेलर्स और निवेशकों की ओर से ऑफलाइन लेनदेन की जगह डिजिटल और वायदा बाजार में कारोबार को प्राथमिकता दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, बाजार की चाल पर वैश्विक कीमतों, मांग और अन्य आर्थिक परिस्थितियों का भी असर रहेगा।

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