Thursday, July 16, 2026

टॉपर वेरिफिकेशन के लिए इस छात्रा को आया बुलावा, मजदूर पिता के चेहरे पर दिखी ख़ुशी

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बिहार बोर्ड 12वीं का रिजल्ट मार्च 2025 के अंत तक और 10वीं का रिजल्ट अप्रैल 2025 के पहले हफ्ते में जारी होने की संभावना है. बोर्ड अध्यक्ष ने जल्द से जल्द रिजल्ट घोषित करने की बात कही है. टॉपर वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद रिजल्ट की घोषणा की जाएगी. बिहार बोर्ड रिजल्ट के मामले में सबसे तेज माना जाता है, और पिछले साल 2024 में भी 12वीं का रिजल्ट 23 मार्च को घोषित किया गया था.

कटिहार जिले के आजमनगर बाजार, पोद्दार टोली की रहने वाली अल्पना कुमारी ने बिहार बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा 2025 में शानदार प्रदर्शन कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है. अल्पना को पटना इंटरमीडिएट काउंसिल से टॉपर वेरिफिकेशन के लिए कॉल आया है. कल्पना को उम्मीद है कि वह बिहार के टॉप 10 छात्रों में शामिल होंगी. अल्पना के पिता सत्यम पोद्दार मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते हैं, लेकिन उनकी बेटी ने अपनी मेहनत और लगन से यह साबित कर दिया कि गरीबी सपनों के आड़े नहीं आ सकती।

अल्पना की मेहनत और सफलता की कहानी

अल्पना ने बताया कि सेल्फ स्टडी और नियमित मेहनत ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया है. उन्होंने मैट्रिक परीक्षा में भी 437 अंक हासिल किए थे, जो उनकी लगातार मेहनत का सबूत है. विज्ञान संकाय की इस छात्रा को टॉपर वेरिफिकेशन के लिए बुलाए जाने पर स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है. आजमनगर बाजार के अवधेश पोद्दार ने कहा कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता, और अल्पना ने इसे साबित कर दिखाया. अल्पना की इस उपलब्धि ने न केवल कटिहार बल्कि पूरे बिहार में गरीबी के बावजूद पढ़ाई में उत्कृष्टता हासिल करने का एक उदाहरण पेश किया है.

बिहार बोर्ड टॉपर वेरिफिकेशन की प्रक्रिया

बिहार बोर्ड टॉपर्स को फाइनल करने के लिए एक सख्त वेरिफिकेशन प्रक्रिया अपनाता है, जो 2016 के टॉपर घोटाले के बाद शुरू की गई थी. इस प्रक्रिया में सबसे ज्यादा अंक पाने वाले छात्रों की कॉपियों की दोबारा जांच की जाती है, ताकि किसी भी गलती की गुंजाइश न रहे. छात्रों की हैंडराइटिंग को उनके मूल उत्तर पत्रों से मिलाया जाता है. इसके बाद टॉपर्स को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है, जहां सब्जेक्ट एक्सपर्ट उनसे उनके विषय से संबंधित सवाल पूछते हैं और कुछ सवाल सॉल्व करने को कहते हैं. उदाहरण के लिए, 2023 की टॉपर मिथी कुमारी ने बताया था कि उन्हें उनके संस्कृत निबंध को दोबारा लिखने के लिए कहा गया था, ताकि उनकी हैंडराइटिंग की पुष्टि हो सके. यह प्रक्रिया नकल और गड़बड़ी को रोकने के लिए शुरू की गई थी, लेकिन कुछ लोग इसे लेकर सवाल भी उठाते हैं.

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