Tuesday, July 14, 2026

झारखंड में BDO और CO की तैनाती के लिए नई नीति लागू, पंचायतों की संख्या बनेगी आधार.

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रांची: झारखंड सरकार ने प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित, जवाबदेह और प्रभावी बनाने की दिशा में अहम कदम उठाया है। कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने झारखंड प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के युक्तिसंगत पदस्थापन को लेकर नया संकल्प जारी किया है। इसके तहत अब प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) और अंचल अधिकारी (CO) की तैनाती संबंधित क्षेत्र में पंचायतों की संख्या के आधार पर की जाएगी।

लंबे समय से महसूस की जा रही थी जरूरत

सरकार के अनुसार कई प्रखंडों में एक ही अधिकारी को BDO और CO दोनों की जिम्मेदारी निभानी पड़ रही थी। इससे विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और राजस्व प्रशासन दोनों प्रभावित हो रहे थे। इसके अलावा कुछ वरिष्ठ अधिकारी भी अपनी सेवा श्रेणी से नीचे के पदों पर कार्यरत थे, जिससे उनकी क्षमता का समुचित उपयोग नहीं हो पा रहा था। नई नीति का उद्देश्य इन कमियों को दूर करना है।

राज्य में प्रशासनिक इकाइयों की स्थिति

वर्तमान में झारखंड में 264 प्रखंड और 268 अंचल हैं। कई स्थानों पर दोनों पदों पर अलग-अलग अधिकारी तैनात हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में एक ही अधिकारी दोनों जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। सरकार ने प्रशासनिक आवश्यकताओं का आकलन करने के बाद नई व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है।

12 पंचायतों के आधार पर होगा पदस्थापन

नई व्यवस्था के तहत जिन प्रखंडों और अंचलों में 12 या उससे कम पंचायतें हैं, वहां एक ही अधिकारी BDO और CO दोनों का दायित्व संभालेंगे। वहीं 12 से अधिक पंचायतों वाले क्षेत्रों में दोनों पदों पर अलग-अलग अधिकारियों की नियुक्ति की जाएगी।

सरकार द्वारा 271 प्रशासनिक इकाइयों का पंचायतों की संख्या के आधार पर वर्गीकरण किया गया है। इनमें 164 इकाइयों में अलग-अलग BDO और CO तैनात होंगे। वहीं 53 इकाइयों में केवल अंचल अधिकारी तथा 54 इकाइयों में केवल प्रखंड विकास पदाधिकारी की एकल पदस्थापना की जाएगी।

विकास और राजस्व कार्यों पर रहेगा अलग-अलग फोकस

सरकार का मानना है कि अलग-अलग अधिकारियों की नियुक्ति से विकास योजनाओं की निगरानी, मनरेगा, प्रधानमंत्री आवास योजना, पंचायत संबंधी कार्यों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के संचालन में तेजी आएगी। दूसरी ओर भूमि से जुड़े मामलों, दाखिल-खारिज, म्यूटेशन, अतिक्रमण, राजस्व वसूली और आपदा प्रबंधन जैसे कार्यों पर भी अधिक प्रभावी ढंग से ध्यान दिया जा सकेगा। इससे लंबित मामलों के शीघ्र निपटारे की उम्मीद है।

वरिष्ठता और सेवा संरचना के अनुरूप मिलेगी जिम्मेदारी

संकल्प में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अधिकारियों की पदस्थापना अब उनकी वरिष्ठता, वेतनमान और सेवा संरचना के अनुरूप की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे अधिकारियों का मनोबल बढ़ेगा और प्रशासनिक कार्यकुशलता में सुधार होगा।

कैबिनेट की मंजूरी के बाद जारी हुआ आदेश

इस प्रस्ताव को राज्य मंत्रिपरिषद ने 2 जुलाई 2026 की बैठक में स्वीकृति दी थी। इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार एवं राजभाषा विभाग ने विस्तृत संकल्प जारी किया। साथ ही उन प्रखंडों और अंचलों की सूची भी जारी की गई है, जहां एकल पदस्थापन और जहां अलग-अलग BDO एवं CO की नियुक्ति की जाएगी।

सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से अधिकारियों पर कार्यभार का बेहतर वितरण होगा, प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ेगी, विकास योजनाओं का क्रियान्वयन तेज होगा और राजस्व प्रशासन पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बनेगा। इसका लाभ सीधे राज्य के नागरिकों को मिलने की उम्मीद है।

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