Tuesday, July 14, 2026

जून में थोक महंगाई बढ़कर 9.87% पर पहुंची, कच्चे तेल और खाद्य कीमतों ने बढ़ाई चिंता.

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WPI Inflation: जून में थोक महंगाई बढ़कर 9.87% पर पहुंची, कच्चे तेल और खाद्य कीमतों ने बढ़ाई चिंता

देश में महंगाई को लेकर चिंता एक बार फिर बढ़ गई है। जून महीने में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर बढ़कर 9.87 प्रतिशत दर्ज की गई है। सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक, मई में थोक महंगाई दर 9.68 प्रतिशत थी। इस बढ़ोतरी के पीछे मुख्य वजह कच्चे तेल, ईंधन और खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों में आई तेजी बताई जा रही है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने मंगलवार को जून के थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए। ये आंकड़े नई 2022-23 आधार वर्ष वाली सीरीज के अनुसार जारी किए गए हैं, जिसे पुराने 2011-12 आधार वर्ष की जगह लागू किया गया है।

ईंधन और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जून में ईंधन और बिजली श्रेणी की महंगाई दर मामूली गिरावट के साथ 27.41 प्रतिशत रही। हालांकि, इस श्रेणी के अंतर्गत आने वाले कुछ उत्पादों में भारी बढ़ोतरी देखने को मिली।

  • खनिज तेलों की महंगाई दर बढ़कर 46.48 प्रतिशत तक पहुंच गई।
  • कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में सालाना आधार पर 34.75 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर अब घरेलू थोक बाजार पर भी दिखाई दे रहा है।

खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी

महंगाई का असर खाने-पीने की चीजों पर भी देखने को मिला है। जून में खाद्य वस्तुओं की थोक महंगाई दर 5.49 प्रतिशत रही।

वहीं, प्राथमिक खाद्य वस्तुओं और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों को शामिल करने वाले WPI फूड इंडेक्स की महंगाई दर 6.14 प्रतिशत दर्ज की गई। इसके अलावा गैर-खाद्य प्राथमिक वस्तुओं की कीमतों में भी तेजी रही और इनकी महंगाई दर बढ़कर 11.07 प्रतिशत हो गई।

हालांकि, विनिर्मित उत्पादों (Manufactured Products) की महंगाई दर 7.48 प्रतिशत पर स्थिर रही। इसमें मई महीने की तुलना में कोई बदलाव नहीं देखा गया।

अप्रैल के आंकड़ों में भी संशोधन

मंत्रालय ने इस रिपोर्ट में अप्रैल 2026 के पहले जारी आंकड़ों को भी संशोधित किया है। पहले अप्रैल की थोक महंगाई दर का अनुमान 8.26 प्रतिशत था, जिसे अब संशोधित कर 8.36 प्रतिशत कर दिया गया है।

आने वाले समय में बढ़ सकती है कीमतों की चुनौती

अर्थ विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे माल और ऊर्जा की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो इसका असर आगे चलकर खुदरा बाजार पर पड़ सकता है। कंपनियों की उत्पादन लागत बढ़ने पर उपभोक्ताओं के लिए वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें बढ़ने की संभावना रहती है।

सरकार जुलाई महीने की थोक महंगाई के आंकड़े 14 अगस्त को जारी करेगी, जिससे महंगाई के रुख को लेकर आगे की तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।

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