Friday, March 6, 2026

जिंदा होंगी मिथिला की यह नदियां, सरकार ने दिए करोड़ों रुपये;

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नदियों को फिर से जिंदा करने वाली योजना से 10 हजार हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और बाढ़ से बचाव में मदद मिलेगी। इस योजना से न केवल सिंचाई में सुधार होगा, बल्कि मखाना और अन्य जलीय उत्पादों की पैदावार भी बढ़ेगी।

प्रगति यात्रा पर निकले सीएम नीतीश कुमार के एक भागीरथ प्रयास की चर्चा खूब हो रही है। कारण यह है कि उन्होंने मिथिला की पुरानी नदियों की फिर से जिंदा करने की कोशिश की है। दरभंगा के पुरानी कमला नदी, जीवछ नदी, पुरानी कमलाधार को फिर से जिंदा करने की बिहार सरकार की योजना से दरभंगा के सदर प्रखंड बेनीपुर, बिरौल बहेड़ी, कुशेश्वरस्थान पूर्वी और पक्षिणी सहित बहादुरपुर प्रखंड के हजारों किसानों को खेत की सिंचाई के लिए फायदा होगा। इसके निर्माण के लिए काफी दिनों से जनप्रतिनिधियों के पास इलाके के लोग गुहार लगा रहे थे। अब इसके पुरजीवित करने की घोषणा से इलाके के लोगों में खुशी का माहौल है। सरकार इस घोषणा के बाद अब कमला बलान नदी की धारा को मोड़ने का काम किया जाएगा जिससे इन नदियों में नदियों में पानी पहुंचाते हुए बाढ़ के समय मे आने वाले अत्यधिक पानी को सुखाड़ वाले इलाके में पहुंचाने की बात कही गई है। बिहार की सरकार ने इसके निर्माण के 350.20 करोड़ रुपये खर्च करने वाली है।
10 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को मदद
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को मधुबनी के सुक्की गांव में कमला बलान नदी और अन्य जलस्रोतों के पुनर्जीवन और बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी योजना का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना से 10 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और बाढ़ से बचाव में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से न केवल सिंचाई में सुधार होगा, बल्कि मखाना और अन्य जलीय उत्पादों की पैदावार भी बढ़ेगी।

प्रगति यात्रा पर निकले सीएम नीतीश कुमार के एक भागीरथ प्रयास की चर्चा खूब हो रही है। कारण यह है कि उन्होंने मिथिला की पुरानी नदियों की फिर से जिंदा करने की कोशिश की है। दरभंगा के पुरानी कमला नदी, जीवछ नदी, पुरानी कमलाधार को फिर से जिंदा करने की बिहार सरकार की योजना से दरभंगा के सदर प्रखंड बेनीपुर, बिरौल बहेड़ी, कुशेश्वरस्थान पूर्वी और पक्षिणी सहित बहादुरपुर प्रखंड के हजारों किसानों को खेत की सिंचाई के लिए फायदा होगा। इसके निर्माण के लिए काफी दिनों से जनप्रतिनिधियों के पास इलाके के लोग गुहार लगा रहे थे। अब इसके पुरजीवित करने की घोषणा से इलाके के लोगों में खुशी का माहौल है। सरकार इस घोषणा के बाद अब कमला बलान नदी की धारा को मोड़ने का काम किया जाएगा जिससे इन नदियों में नदियों में पानी पहुंचाते हुए बाढ़ के समय मे आने वाले अत्यधिक पानी को सुखाड़ वाले इलाके में पहुंचाने की बात कही गई है। बिहार की सरकार ने इसके निर्माण के 350.20 करोड़ रुपये खर्च करने वाली है।

10 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को मददमुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने रविवार को मधुबनी के सुक्की गांव में कमला बलान नदी और अन्य जलस्रोतों के पुनर्जीवन और बाढ़ नियंत्रण से जुड़ी योजना का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने बताया कि इस योजना से 10 हजार हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई की सुविधा मिलेगी और बाढ़ से बचाव में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना से न केवल सिंचाई में सुधार होगा, बल्कि मखाना और अन्य जलीय उत्पादों की पैदावार भी बढ़ेगी।विज्ञापननहर विस्तारीकरण योजना का निरीक्षणमुख्यमंत्री ने एनएच-57 के पास कोसी नहर के विस्तारीकरण परियोजना का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि इस योजना से मधुबनी और दरभंगा जिलों के किसानों को सिंचाई की बेहतर सुविधा मिलेगी। अधिकारियों ने बताया कि 569.18 करोड़ रुपये की लागत से 80 गांवों को लाभ होगा और 26,879 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई सुनिश्चित की जाएगी।1987 में बाढ़ के कारण टूटा था तटबंधदरअसल, दरभंगा में 1987 में आए प्रलयंकारी बाढ़ के बाद जिले के तारडीह प्रखंड से गुजर रही कमला बलान नदी के तटबंध टूट गया था। इस कारण पूरे जिला बाढ़ की पानी घिर गया था। बाढ़ के बाद तत्तकालीन बिहार की सरकार ने तटबन्ध का मरम्मत कराया था। इसके बाद से ही इन नदियों का जल स्तर घट गया था। जानकर बताते हैं कि मधुबनी जिला के जयनगर कमला नदी पर बांध के सुदृढ़ीकरण का काम किया गया था इसके बाद इन नदियों में पानी आना लगभग बंद हो गया था। इससे किसानों को फसलों की बुआई सिंचाई की परेशानी बढ़ गई थी। कमला नदी के तट बंध के निर्माण से पहले इन नदियों में पानी रहा करती थी लेकिन झंझारपुर से होकर दरभंगा के तारडीह प्रखंड से होकर गुजरने वाली कमला नदी के बांया तटबंध की मरमत के बाद से बेनीपुर के रास्ते गुजरने वाली कमलाधार, जीवछ नदी और जीवछ कमला नदी की धार में पानी बिल्कुल बन्द हो गया था। बतादे की इसके तटबन्ध का निर्माण वर्ष 1987 में उस समय कराया गया जब जिले प्रलयंकारी बाढ़ काफी तबाही मचाई थी जिसके बाद कि तत्तकालीन सरकार कमला नदी के बायां तटबन्ध को बनवाया था। लोग बताते है कि 1987 के के बाद वर्ष 2004 में भी जिले में बाढ़ ने दस्तक दी थी लेकिन उतनी बड़ी तबाही नही मचाई थी।

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