Health News, 7 November 2026: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में देर रात तक मोबाइल चलाना, काम के ईमेल का जवाब देना और अनियमित दिनचर्या के कारण लोगों की नींद प्रभावित हो रही है। कई लोग रोजाना पर्याप्त नींद नहीं ले पाते। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या लंबे समय तक नींद की कमी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकती है?
हर साल 7 नवंबर को राष्ट्रीय कैंसर जागरूकता दिवस (National Cancer Awareness Day) मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक करना, शुरुआती लक्षणों की पहचान और समय पर जांच व इलाज के लिए प्रेरित करना है।
पुणे स्थित M.O.C. कैंसर केयर की मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. ऋतु दवे के अनुसार, नींद की कमी और कैंसर के बीच संबंध का जवाब केवल हां या ना में नहीं दिया जा सकता। कुछ शोधों में नींद के बिगड़े पैटर्न और कुछ प्रकार के कैंसर के बीच संभावित संबंध सामने आया है, लेकिन यह साबित नहीं हुआ है कि केवल कम नींद लेना ही कैंसर का सीधा कारण है।
शरीर के लिए नियमित नींद क्यों जरूरी है?
डॉ. ऋतु दवे के अनुसार, हमारा शरीर 24 घंटे की एक प्राकृतिक जैविक घड़ी के अनुसार काम करता है। इसे सर्केडियन रिदम (Circadian Rhythm) कहा जाता है। यह सोने-जागने के समय, हार्मोन के स्राव, शरीर के तापमान और कई अन्य जैविक प्रक्रियाओं को नियंत्रित करने में मदद करती है।
नींद के दौरान शरीर ऊतकों की मरम्मत, इम्यून सिस्टम को बेहतर ढंग से काम करने में सहायता और मेटाबॉलिज्म को नियंत्रित करने जैसे काम करता है।
इस दौरान मेलाटोनिन नामक हार्मोन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जिसका स्राव सामान्यतः अंधेरा होने पर बढ़ता है। प्रयोगशाला में किए गए कुछ अध्ययनों से पता चला है कि मेलाटोनिन और सर्केडियन रिदम में गड़बड़ी कैंसर से जुड़ी कुछ जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि खराब नींद सीधे इंसानों में कैंसर पैदा करती है।
कैंसर के खतरे को लेकर रिसर्च क्या कहती है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की संस्था इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर (IARC) ने वर्ष 2019 में रात की शिफ्ट में लंबे समय तक काम करने को ग्रुप 2A यानी ‘संभवतः मनुष्यों के लिए कैंसरकारी’ श्रेणी में रखा था।
इस वर्गीकरण के पीछे मुख्य चिंता शरीर की प्राकृतिक जैविक घड़ी में लंबे समय तक होने वाली गड़बड़ी है। रात में काम करने से सोने-जागने का सामान्य चक्र प्रभावित हो सकता है और मेलाटोनिन के स्राव में बदलाव आ सकता है।
कुछ शोधों में लंबे समय तक नाइट शिफ्ट में काम करने और ब्रेस्ट, प्रोस्टेट तथा कोलोरेक्टल कैंसर के बीच संभावित संबंध की जांच की गई है।
हालांकि, इस वर्गीकरण का अर्थ यह नहीं है कि रात में काम करने वाले हर व्यक्ति को कैंसर होगा। इसी तरह कभी-कभार देर रात तक जागने को भी कैंसर का सीधा कारण नहीं माना जा सकता।
15.5 लाख लोगों पर हुए अध्ययन में क्या सामने आया?
वर्ष 2018 में BMC Cancer में प्रकाशित एक व्यवस्थित समीक्षा और मेटा-विश्लेषण में करीब 15.5 लाख लोगों से जुड़े 65 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया था।
इस अध्ययन में कम या अधिक नींद की अवधि और कैंसर के जोखिम के बीच कोई स्पष्ट और महत्वपूर्ण संबंध नहीं मिला। हालांकि, कुछ विशेष समूहों के आंकड़ों में संभावित संबंध के संकेत मिले थे, लेकिन डोज-रिस्पॉन्स विश्लेषण से इसकी पुष्टि नहीं हो सकी।
विशेषज्ञों का मानना है कि नींद और कैंसर के संबंध को समझने के लिए अभी और व्यापक शोध की आवश्यकता है। इसलिए केवल अधूरी जानकारी के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।
भारत में नींद की समस्या क्यों बढ़ रही है?
डॉ. ऋतु दवे के अनुसार, भारत में कई पेशेवरों के लिए नियमित नींद का समय बनाए रखना मुश्किल होता है। इनमें स्वास्थ्यकर्मी, फैक्ट्री कर्मचारी, आईटी सेक्टर में काम करने वाले लोग, सुरक्षाकर्मी और परिवहन क्षेत्र से जुड़े कर्मचारी शामिल हैं।
इसके अलावा देर रात तक मोबाइल का इस्तेमाल, लंबा सफर, घरेलू जिम्मेदारियां और अनियमित काम के घंटे भी नींद प्रभावित करते हैं।
विशेषज्ञों का कहना है कि एक रात पर्याप्त नींद नहीं मिलने पर घबराने की जरूरत नहीं है। लेकिन अगर लंबे समय तक नींद की समस्या बनी रहती है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
अच्छी नींद के लिए अपनाएं ये उपाय
नींद की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए कुछ सामान्य आदतों में बदलाव किया जा सकता है:
- नियमित समय पर सोएं और जागें: सोने और उठने का एक निश्चित समय बनाए रखने की कोशिश करें।
- पर्याप्त नींद लें: वयस्कों को सामान्यतः हर रात कम से कम सात घंटे की नींद लेने की सलाह दी जाती है। उम्र और व्यक्तिगत जरूरत के अनुसार यह अवधि अलग हो सकती है।
- कैफीन का सेवन सीमित करें: दिन के आखिरी हिस्से में चाय और कॉफी का सेवन कम रखें।
- सोने से पहले स्क्रीन से दूरी रखें: मोबाइल, टीवी और अन्य तेज रोशनी वाली स्क्रीन का इस्तेमाल कम करें।
- आरामदायक वातावरण बनाएं: सोने का कमरा शांत, अंधेरा और आरामदायक रखें।
- नाइट शिफ्ट में नियमितता बनाए रखें: काम के समय के अनुसार सोने का एक निश्चित रूटीन बनाने की कोशिश करें।
- लगातार परेशानी होने पर डॉक्टर से मिलें: अनिद्रा, तेज खर्राटे, सोते समय सांस लेने में परेशानी या दिन में अत्यधिक नींद आने जैसी समस्याओं को नजरअंदाज न करें।
कैंसर के जोखिम को कम करने के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान
स्वस्थ जीवनशैली कैंसर से बचाव के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके लिए तंबाकू से दूर रहना, शराब से परहेज करना, संतुलित खानपान अपनाना और नियमित शारीरिक गतिविधि बनाए रखना उपयोगी कदम हैं।
इसके साथ ही उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार डॉक्टर की सलाह से जरूरी कैंसर स्क्रीनिंग करानी चाहिए। शरीर में कोई असामान्य या लगातार बने रहने वाला लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना भी जरूरी है।
डॉक्टर की सलाह: नींद को न करें नजरअंदाज
डॉ. ऋतु दवे के अनुसार, अच्छी नींद स्वस्थ जीवन का जरूरी हिस्सा है। हालांकि, अभी यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता कि नींद की कमी सीधे कैंसर का कारण बनती है, लेकिन नींद और कैंसर के संभावित संबंध पर वैज्ञानिक शोध जारी है।
इसलिए शरीर की प्राकृतिक जैविक लय का ध्यान रखना, नियमित दिनचर्या अपनाना और पर्याप्त नींद लेना बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। नींद से जुड़ी लगातार परेशानी या किसी स्वास्थ्य संबंधी चिंता के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श करें।
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