नई दिल्ली : केंद्र सरकार ने रविवार को कहा कि भारत में घरेलू गैस की कीमतें दुनिया के कई दूसरे देशों के मुकाबले कम हैं. सरकार का बयान उस समय आया है, जबकि घरेलू सिलेंडर की कीमतों में 29 रुपये का इजाफा किया गया है. दरअसल, कीमत बढ़ाने के बाद लोगों ने सरकार के फैसले की आलोचना शुरू कर दी थी. सरकार ने बयान जारी कर बताया कि भारत में घरेलू एलपीजी की कीमतें पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका समेत कई देशों और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा कनाडा जैसे विकसित देशों की तुलना में अब भी कम हैं.
सरकार ने कीमत बढ़ोतरी का बचाव किया है. एक बयान जारी कर यह बताया गया कि आज की वृद्धि के बावजूद सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को प्रत्येक सिलेंडर की बिक्री पर 703 रुपये का नुकसान हो रह है. दिल्ली में 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत अब 942 हो गई है, जो पहले 913 रुपये थी. जबकि प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) के लाभार्थियों को साल में चार बार 300 रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद सिलेंडर ₹642 में उपलब्ध होगा. हालांकि, पिछले साल यह सब्सिडी साल में नौ बार देने की घोषणा की गई थी.
सरकार ने बताया कि आम उपभोक्ता केवल 942 रु. का भुगतान कर रहे हैं, जबकि शेष लागत का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम विपणन कंपनियां और सरकार वहन कर रही हैं. उनके अनुसार पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण एलपीजी का वैश्विक बेंचमार्क ‘सऊदी कॉन्ट्रैक्ट प्राइस’ फरवरी के बाद लगभग 46 प्रतिशत बढ़ गया है. इसके चलते घरेलू एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति की वास्तविक लागत 1,600 रुपये से अधिक हो चुकी है.
सरकार के मुताबिक, घरेलू एलपीजी पर नुकसान पिछले वित्त वर्ष में बढ़कर लगभग₹60,000 करोड़ हो गया, जो एक वर्ष पहले 41,338 करोड़ थी. इस नुकसान की आंशिक भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने पेट्रोलियम कंपनियों को ₹30,000 करोड़ की क्षतिपूर्ति देने को मंजूरी दी है.
आपको बता दें कि इससे पहले सात मार्च को घरेलू रसोई गैस के दाम 60 रुपये प्रति सिलेंडर बढ़ाए गए थे. इस तरह से रसोई गैस सिलेंडर के दाम कुल मिलाकर 89 रुपये बढ़ चुके हैं.
कीमत बढ़ोतरी पर समाजवादी पार्टी के सांसद राजीव राय ने कहा, “पश्चिम बंगाल चुनावों के दौरान भी मैंने कहा था कि यह ऐसी सरकार है जो सही मौके का इंतजार करती है, और चुनाव खत्म होते ही कीमतें बढ़ना शुरू हो जाएंगी. वे इसे किश्तों में, दिन-प्रतिदिन बढ़ाते जाएंगे. यह दिशाहीन सरकार है, जिसके पास कोई दूरदृष्टि, कोई रणनीति, कोई योजना नहीं है, और इसका खामियाजा देश भुगत रहा है.”


