Thursday, April 30, 2026

कच्चे तेल की कीमत 125 डॉलर प्रति बैरल से अधिक हो चुकी है, ईरान संकट गहराने की वजह से दाम बढ़े.

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नई दिल्ली : कच्चे तेल की कीमत 125 डॉलर प्रति बैरल पहुंच चुकी है. 2022 में कच्चे तेल की कीमत में बड़ा उछाल आया था, उसके बाद से कभी भी तेल की कीमत इतनी अधिक नहीं हुई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ताजा बयान के बाद तेल की कीमतें ऊपर चली गईं. ट्रंप प्रशासन की ओर से जारी बयान में ईरान को फिर से धमकी दी गई है. दोनों देशों के बीच बातचीत रुकने की वजह से कच्चे तेल के दाम बढ़ गए हैं.

जून डिलीवरी वाला ब्रेंट क्रूड शुरुआती कारोबार में 6.2 फीसदी बढ़कर 125.36 डॉलर प्रति बैरल हो गया है, जबकि जुलाई डिलीवरी वाला ब्रेंट 113.85 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है. फरवरी में युद्ध शुरू होने से पहले ब्रेंट क्रूड की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी.

ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध दो महीने से ऊपर हो गए हैं. युद्ध कब खत्म होगा, किसी को पता नहीं है. ट्रंप के बार-बार बदलते बयान और ईरान की प्रतिक्रिया की वजह से अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है.

ईवाई इंडिया ने कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमत औसतन 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो चालू वित्त वर्ष में भारत की जीडीपी वृद्धि दर लगभग 6 प्रतिशत तक गिर सकती है और खुदरा मुद्रास्फीति आरबीआई द्वारा निर्धारित 6 प्रतिशत की ऊपरी सीमा तक बढ़ सकती है.

ईवाई इंडिया के मुख्य नीति सलाहकार डीके श्रीवास्तव ने पीटीआई को कहा कि यद्यपि नीतिगत हस्तक्षेपों की गुंजाइश सीमित है, फिर भी नीति निर्माताओं को रेपो दर में वृद्धि और कच्चे तेल की आपूर्ति के स्रोतों के विविधीकरण में तेजी लाने पर विचार करना चाहिए, क्योंकि पश्चिम एशियाई संकट जारी रहने पर भारतीय कच्चे तेल की टोकरी (आईसीबी) की कीमत और बढ़ सकती है.

श्रीवास्तव ने कहा, “यदि वित्त वर्ष 2027 में आईसीबी की कीमत औसतन 120 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल रहती है, तो भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि लगभग 6 प्रतिशत तक गिर सकती है और सीपीआई मुद्रास्फीति बढ़कर 6 प्रतिशत हो सकती है. राजकोषीय घाटे पर प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए, ऊर्जा की बढ़ी हुई कीमतों का भार खुदरा विक्रेताओं पर अपेक्षाकृत अधिक डाला जाना चाहिए.”

अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन (ईआईए) द्वारा अप्रैल 2026 में जारी किए गए अल्पकालिक ऊर्जा पूर्वानुमान के अनुसार, ब्रेंट कच्चे तेल की कीमतें 2026 की पहली तिमाही में औसतन 81 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 2026 की दूसरी तिमाही में 115 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल के शिखर तक पहुंचने का अनुमान है. संकट की स्थिति के आधार पर, भविष्य में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भी आ सकती है.

भारत में मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज पर कच्चे तेल की कीमतों 10,000 रुपये प्रति बैरल के पार पहुंच गईं हैं. एमसीएक्स पर कच्चे तेल की कीमतों में तीन फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई है.

दाम बढ़ने की वजह-

  • — ट्रंप का वह बयान है, जिसमें उन्होंने ईरान पर अमेरिकी नाकाबंदी जारी रखने की बात कही है. उनके इस बयान से होर्मुज स्ट्रेट प्रभावित रहेगा, इसलिए कच्चे तेल की आपूर्ति में मुश्किल आ सकती है.
  • — दूसरी ओर ईरान ने भी होर्मुज स्ट्रेट को लगभग बंद कर रखा है.
  • — तेल उत्पादन करने वाले देशों के समूह ओपेक ने प्रोडक्शन में कटौती का ऐलान किया है.
  • — यूएई ने ओपेक से बाहर निकलने की घोषणा की है.
  • — जब तक होर्मुज प्रभावित रहेगा, तब तक स्थिति में बदलाव की उम्मीद नहीं.

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