मुंबई: वैश्विक आर्थिक संकेतों, भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार सीमित बढ़त के साथ बंद हुए। कारोबार के शुरुआती सत्र में बाजार ने अच्छी तेजी दिखाई, लेकिन अंतिम घंटे में बैंकिंग और चुनिंदा बड़े शेयरों में बिकवाली के चलते अधिकांश बढ़त खत्म हो गई। इसके बावजूद आईटी और ऑटोमोबाइल कंपनियों के शेयरों में मजबूती से बाजार को समर्थन मिला।
सेंसेक्स लगभग स्थिर, निफ्टी में मामूली गिरावट
बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 1.44 अंक की हल्की बढ़त के साथ 77,186.87 पर बंद हुआ। कारोबार के दौरान यह करीब 394 अंक चढ़कर 77,579.69 के दिन के उच्च स्तर तक पहुंचा था, लेकिन अंतिम चरण में मुनाफावसूली के कारण बढ़त टिक नहीं सकी।
वहीं, एनएसई निफ्टी 5.75 अंक यानी करीब 0.02 प्रतिशत की मामूली गिरावट के साथ 24,072.75 पर बंद हुआ।
इन शेयरों ने दिखाई मजबूती
दिनभर के कारोबार में आईटी और ऑटो सेक्टर के शेयरों का प्रदर्शन बेहतर रहा। प्रमुख बढ़त दर्ज करने वाले शेयरों में इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो), एचसीएल टेक्नोलॉजीज, बजाज फाइनेंस, मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा और टेक महिंद्रा शामिल रहे।
इन शेयरों पर रहा दबाव
दूसरी ओर, कुछ प्रमुख कंपनियों के शेयरों में मुनाफावसूली देखने को मिली। एचडीएफसी बैंक, एक्सिस बैंक, बजाज फिनसर्व, भारत इलेक्ट्रॉनिक्स (BEL) और एटरनल जैसे शेयरों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार की बढ़त सीमित रही।
बाजार की चाल को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारण
- बड़े शेयरों में मुनाफावसूली: रिलायंस इंडस्ट्रीज और प्रमुख बैंकिंग शेयरों में बिकवाली का असर बाजार पर दिखाई दिया।
- वैश्विक बाजारों के कमजोर संकेत: एशियाई शेयर बाजारों में कमजोरी का असर घरेलू निवेशकों की धारणा पर भी पड़ा। दक्षिण कोरिया, जापान और चीन के प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे।
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली: विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने लगातार बिकवाली जारी रखी। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले कारोबारी सत्र में उन्होंने लगभग ₹735.83 करोड़ के शेयर बेचे।
- कच्चे तेल की कीमतें: अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतों में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जिससे महंगाई को लेकर कुछ राहत की उम्मीद बनी रही।
- अमेरिकी महंगाई के आंकड़े: अमेरिका में मुद्रास्फीति के अपेक्षाकृत नरम आंकड़ों से वैश्विक बाजारों में ब्याज दरों को लेकर चिंता कुछ कम हुई, जिसका सकारात्मक असर भारतीय बाजार पर भी देखने को मिला।
निवेशकों की नजर वैश्विक संकेतों पर
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में निवेशकों की निगाह वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमतों, विदेशी निवेश के रुख और कंपनियों के तिमाही नतीजों पर रहेगी। इन कारकों के आधार पर बाजार की अगली दिशा तय हो सकती है।


