Tuesday, April 28, 2026

ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल में उछाल से सेंसेक्स-निफ्टी गिरे, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप में मजबूती रही.

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 भारतीय शेयर बाजार के लिए मंगलवार का दिन उतार-चढ़ाव भरा रहा. वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी और पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण घरेलू बेंचमार्क इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुए. निवेशकों ने अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ती तल्खी को देखते हुए सतर्क रुख अपनाया, जिससे सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान में रहे.

बाजार का लेखा-जोखा
कारोबार के अंत में, बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का सेंसेक्स 416.72 अंक या 0.54% गिरकर 76,886.91 पर बंद हुआ. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 97 अंक या 0.40% फिसलकर 23,995.70 के स्तर पर आ गया. निफ्टी का 24,000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे गिरना बाजार में कमजोरी के संकेतों को दर्शाता है.

सेक्टर और स्टॉक्स का हाल
सेंसेक्स के दिग्गज शेयरों में अडानी पोर्ट्स, आईटीसी (ITC), भारती एयरटेल और टेक महिंद्रा बढ़त बनाने में कामयाब रहे. इसके विपरीत, एचसीएल टेक, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक और इन्फोसिस जैसे बड़े शेयरों में बिकवाली का दबाव देखा गया, जिससे बाजार नीचे आया.

क्षेत्रवार प्रदर्शन देखें तो बैंकिंग सेक्टर सबसे अधिक दबाव में रहा. निफ्टी पीएसयू बैंक और निफ्टी बैंक इंडेक्स में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई. हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का फायदा तेल और गैस के साथ-साथ कमोडिटी शेयरों को मिला, जिससे निफ्टी ऑयल एंड गैस और निफ्टी मेटल इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए.

क्रूड ऑयल और जियो-पॉलिटिकल तनाव
बाजार में गिरावट की मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में 2.78% की उछाल रही, जिससे ब्रेंट क्रूड 111.24 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के शांति प्रस्ताव से संतुष्ट नहीं हैं. ईरान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हॉर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की पेशकश तो की है, लेकिन परमाणु कार्यक्रम पर चर्चा को फिलहाल टाल दिया है. इस अनिश्चितता ने तेल बाजारों में डर पैदा कर दिया है.

रुपये की कमजोरी और मिडकैप का प्रदर्शन
बेंचमार्क इंडेक्स में गिरावट के बावजूद, व्यापक बाजार में मजबूती देखी गई. निफ्टी मिडकैप 100 में 0.28% और निफ्टी स्मॉलकैप 100 में 0.42% की तेजी रही, जो छोटे और मध्यम आकार के शेयरों में निवेशकों के भरोसे को दर्शाता है.

दूसरी ओर, भारतीय रुपया आज कमजोर होकर 94.54 के स्तर पर बंद हुआ. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की लगातार बिकवाली ने घरेलू मुद्रा पर दबाव बनाए रखा. विश्लेषकों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले दिनों में महंगाई का खतरा बढ़ सकता है.

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