14 अप्रैल को सतुआनी संक्रांति मनाई जा रही है. इस दिन सूर्य देव मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसके साथ ही खरमास समाप्त हो जाता है. इस दिन विशेष रूप से सत्तू का सेवन, स्नान-दान और सूर्य देव की पूजा की जाती है.
आज मंगलवार को सुतला संक्रांति यानी सतुआनी का पावन पर्व मनाया जा रहा है. यह त्योहार खास तौर पर बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में मनाया जाता है. सतुआ संक्रांति को हिंदू सौर कैलेंडर के अनुसार नए साल की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है. आज से ही कई क्षेत्रों में नए पंचांग का अनुसरण शुरू होता है और किसान नई रबी फसल के आगमन की खुशी मनाते हैं. पंजाब में इस दिन ‘बैसाखी’ और बंगाल में ‘पोइला बैशाख’ मनाया जाता है. धार्मिक दृष्टि से आज के दिन सूर्य देव मीन राशि से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे मेष संक्रांति भी कहा जाता है.
क्यों मनाई जाती है सतुआ संक्रांति?
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब सूर्य देव बृहस्पति की राशि मीन से निकलकर मेष राशि में प्रवेश करते हैं, तो ‘खरमास’ समाप्त हो जाता है. इसके साथ ही विवाह, मुंडन और गृह प्रवेश जैसे मांगलिक कार्यों पर लगी रोक खत्म हो जाती है. इसी खुशी में यह पर्व मनाया जाता है.
सतुआनी पर क्या करें?
आज के दिन कुछ विशेष रीति-रिवाजों का पालन करने से पुण्य और स्वास्थ्य दोनों की प्राप्ति होती है:
- सुबह किसी पवित्र नदी में स्नान करें या घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें.
- स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करें और उनके मंत्रों का जाप करें.
- मेष संक्रांति पर सूर्य अपनी उच्च राशि में होते हैं, जिससे उनकी ऊर्जा का प्रभाव अधिक होता है. इस दिन सच्चे मन से सूर्य देव की उपासना करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है.
- आज के दिन चने या जौ के सत्तू का सेवन करना विशेष रूप से शुभ माना जाता है. लोग सत्तू में नमक, प्याज, मिर्च या गुड़ मिलाकर इसे मुख्य आहार के रूप में खाते हैं.
- साथ ही, आम का टिकोला (कच्चा आम) खाना भी आज की खास परंपरा है.
सतुआन के दिन दान का महत्व
धार्मिक मान्यता है कि सतुआनी के दिन दान करने से ‘अक्षय’ फल की प्राप्ति होती है. आज के दिन ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को इन वस्तुओं का दान करना शुभ माना जाता है:
- पानी से भरा हुआ मिट्टी का घड़ा
- सत्तू
- गुड़
- हाथ वाला पंखा
- छाता
- जूते-चप्पल


