वायु प्रदूषण सिर्फ सांस की परेशानी नहीं बढ़ाता, बल्कि हृदय और रक्त वाहिकाओं को भी प्रभावित कर सकता है। PM2.5 जैसे बारीक कण शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाकर ब्लड प्रेशर पर असर डाल सकते हैं।
रांची | 30 अक्टूबर 2026
वायु प्रदूषण को आमतौर पर खांसी, सांस लेने में परेशानी और फेफड़ों की बीमारियों से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन खराब हवा का असर इससे कहीं अधिक व्यापक हो सकता है। हवा में मौजूद बेहद छोटे प्रदूषक कण फेफड़ों तक पहुंचने के साथ शरीर की रक्त वाहिकाओं और हृदय के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम बढ़ सकता है।
PM2.5 और PM10 कैसे बढ़ाते हैं ब्लड प्रेशर?
कोलकाता के सीके बिड़ला हॉस्पिटल्स, सीएमआरआई के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अरूप हल्दर के अनुसार, हवा में मौजूद PM2.5 और PM10 जैसे सूक्ष्म कण शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस पैदा कर सकते हैं। PM2.5 के कण इतने छोटे होते हैं कि वे फेफड़ों के गहरे हिस्सों तक पहुंच सकते हैं। इनके संपर्क से रक्त वाहिकाओं के सामान्य कामकाज पर असर पड़ सकता है।
प्रदूषित हवा में सांस लेने से शरीर का सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम भी सक्रिय हो सकता है। इससे हृदय गति बढ़ने और रक्त वाहिकाओं के सिकुड़ने की स्थिति बन सकती है। परिणामस्वरूप ब्लड प्रेशर में अस्थायी बढ़ोतरी हो सकती है।
पहले से हाइपरटेंशन से जूझ रहे लोगों के लिए लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहना अधिक जोखिम भरा हो सकता है। कई बार इसका असर तुरंत महसूस नहीं होता, लेकिन शरीर पर पर्यावरणीय दबाव बना रह सकता है।
किन लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत?
ग्रेटर नोएडा के कैलाश हॉस्पिटल के कंसल्टेंट फिजिशियन डॉ. तुषार गोयल के मुताबिक, वायु प्रदूषण से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम सभी लोगों के लिए समान नहीं होते। कुछ लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
इनमें शामिल हैं:
- पहले से हाई ब्लड प्रेशर के मरीज।
- हृदय संबंधी बीमारी से पीड़ित लोग।
- डायबिटीज के मरीज।
- बुजुर्ग और अन्य पुरानी बीमारियों से जूझ रहे लोग।
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिक प्रदूषण के दौरान बाहर तेज शारीरिक गतिविधियां करने से बचना चाहिए। जिन लोगों को पहले से कोई बीमारी है, उन्हें नियमित रूप से ब्लड प्रेशर की निगरानी करनी चाहिए और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेते रहना चाहिए।
दिल और रक्त वाहिकाओं पर क्या पड़ता है असर?
जयपुर के सीके बिड़ला हॉस्पिटल्स के कार्डियोलॉजी विभाग के एडिशनल डायरेक्टर डॉ. राहुल शर्मा के अनुसार, प्रदूषित हवा में मौजूद PM2.5 जैसे कण फेफड़ों में गहराई तक पहुंचकर रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकते हैं। इनके कारण शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ सकता है, जिससे रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचने की आशंका रहती है।
लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से हाई ब्लड प्रेशर और हृदय संबंधी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, पहले से दिल की बीमारी, डायबिटीज या हाइपरटेंशन से पीड़ित लोगों को अधिक सतर्क रहना चाहिए।
हाई AQI होने पर क्या सावधानियां बरतें?
जब आपके इलाके में वायु गुणवत्ता खराब हो, तो कुछ सावधानियां अपनाकर प्रदूषण के संपर्क को कम किया जा सकता है।
- AQI खराब होने पर बाहर दौड़ने और अधिक मेहनत वाली एक्सरसाइज से बचें।
- संभव हो तो शारीरिक गतिविधियां घर के अंदर करें।
- प्रदूषण अधिक होने पर घर और कार की खिड़कियां बंद रखें।
- घर के अंदर सही क्षमता वाला एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल किया जा सकता है।
- बाहर निकलते समय अच्छी फिटिंग वाला N95 मास्क पहनें।
- धूम्रपान से बचें और आसपास भी धूम्रपान न होने दें।
- ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं।
- डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाएं लेते रहें।
HEPA एयर प्यूरीफायर से मिल सकती है अतिरिक्त सुरक्षा
कोलकाता के रवींद्रनाथ टैगोर इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ कार्डियक साइंसेज के कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अयान कर के अनुसार, प्रदूषण के कारण शरीर में तनाव प्रतिक्रिया, सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ सकता है। इससे रक्त वाहिकाओं के कामकाज पर असर पड़ता है और ब्लड प्रेशर बढ़ने का जोखिम पैदा हो सकता है।
उनके मुताबिक, घर में सही आकार और क्षमता वाला HEPA एयर प्यूरीफायर इस्तेमाल करने से हवा में मौजूद सूक्ष्म कणों का स्तर कम करने में मदद मिल सकती है। वर्ष 2025 में जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में कुछ प्रतिभागियों में HEPA फिल्ट्रेशन के इस्तेमाल के बाद सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर में औसतन करीब 3 mmHg की कमी देखी गई थी। हालांकि, इससे यह साबित नहीं होता कि एयर प्यूरीफायर हर व्यक्ति का ब्लड प्रेशर कम कर देगा।
एयर प्यूरीफायर खरीदते समय कमरे के आकार के अनुसार उसका क्लीन एयर डिलीवरी रेट (CADR) देखना चाहिए। फिल्टर का समय पर रखरखाव भी जरूरी है। ओजोन पैदा करने वाले उपकरणों से बचने की सलाह दी जाती है।
क्या हाई AQI से हर व्यक्ति को हो सकता है हाइपरटेंशन?
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक AQI का मतलब यह नहीं है कि हर व्यक्ति को हाई ब्लड प्रेशर हो जाएगा। प्रदूषण का असर व्यक्ति की सेहत, पहले से मौजूद बीमारियों और प्रदूषण के संपर्क की अवधि पर निर्भर करता है।
हालांकि, लंबे समय तक बार-बार प्रदूषित हवा में रहने से हाइपरटेंशन और हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए केवल खानपान और व्यायाम पर ध्यान देना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि जिस हवा में हम सांस लेते हैं उसकी गुणवत्ता को लेकर भी जागरूक रहना जरूरी है।
ध्यान दें: हाई AQI के कारण सीने में दर्द या सांस लेने में गंभीर परेशानी हो तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। ब्लड प्रेशर की दवा की खुराक अपने आप न बदलें।
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