Saturday, April 25, 2026

सेबी ने ब्रोकर्स के लिए नेट वर्थ का नया फॉर्मूला प्रस्तावित किया है,जो अब कैश बैलेंस के साथ सक्रिय ग्राहकों की संख्या पर आधारित होगा.

Share

नई दिल्ली: भारतीय बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने स्टॉक ब्रोकर्स के लिए ‘वेरिएबल नेट वर्थ’ की गणना के नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है. इस नए कदम का उद्देश्य ब्रोकर्स की वित्तीय मजबूती को उनके बढ़ते कामकाज और परिचालन जोखिमों के साथ बेहतर ढंग से जोड़ना है. सेबी ने स्पष्ट किया है कि ब्रोकर्स के पास पर्याप्त ‘फाइनेंशियल कुशन’ होना चाहिए ताकि किसी भी अनहोनी की स्थिति में निवेशकों का पैसा सुरक्षित रहे.

क्यों पड़ी बदलाव की जरूरत?
वर्तमान नियमों (2022 के संशोधन) के तहत, किसी ब्रोकर की वेरिएबल नेट वर्थ पिछले छह महीनों के दौरान उनके पास मौजूद ग्राहकों के औसत दैनिक कैश बैलेंस का 10% होती है. हालांकि, सेबी के हालिया ‘अपस्ट्रीमिंग’ नियमों के बाद यह फॉर्मूला कमजोर पड़ गया है. अब ब्रोकर्स को ग्राहकों का पैसा सीधे क्लियरिंग कॉर्पोरेशन को ट्रांसफर करना पड़ता है, जिससे ब्रोकर्स के पास बहुत कम बैलेंस बचता है. कम बैलेंस का मतलब था कम नेट वर्थ की जरूरत, जो सेबी की नजर में जोखिम भरा था.

क्या है नया प्रस्तावित फॉर्मूला?
सेबी ने अब एक मिश्रित दृष्टिकोण अपनाया है. नए फॉर्मूले में दो मुख्य स्तंभ होंगे.

क्रेडिट बैलेंस का हिस्सा: पिछले छह महीनों के औसत क्लाइंट क्रेडिट बैलेंस का 10% नेट वर्थ का एक हिस्सा बना रहेगा.

ग्राहकों की संख्या (स्केल ऑफ ऑपरेशंस): यह सबसे बड़ा बदलाव है. अब ब्रोकर के पास कितने ‘एक्टिव क्लाइंट्स’ हैं, उस आधार पर अतिरिक्त पूंजी रखनी होगी:

डायरेक्ट क्लाइंट्स के लिए: यदि किसी ब्रोकर के पास 10,000 से 50,000 सक्रिय ग्राहक हैं, तो उसे ₹50 लाख अतिरिक्त रखने होंगे. इसके बाद हर 50,000 ग्राहकों पर ₹50 लाख की अतिरिक्त नेट वर्थ जोड़नी होगी.

अधिकृत व्यक्तियों (APs) के माध्यम से: चूंकि सब-ब्रोकर्स या एपी के जरिए आने वाले ग्राहकों में जोखिम अधिक माना जाता है, इसलिए उनके लिए नियम सख्त हैं. 2,500 ग्राहकों तक ₹5 लाख और 10,000 ग्राहकों तक ₹25 लाख की अतिरिक्त पूंजी अनिवार्य होगी.

सुरक्षा की ‘दूसरी ढाल’
सेबी के अनुसार, नेट वर्थ मार्जिन के बाद सुरक्षा की “दूसरी रक्षा पंक्ति” है. बड़े डिस्काउंट ब्रोकर्स, जिनके पास करोड़ों ग्राहक हैं, उन्हें अब अपनी जेब से अधिक पूंजी बाजार में लगानी होगी. इससे यह सुनिश्चित होगा कि अगर कभी कोई तकनीकी खराबी या बड़ा घाटा होता है, तो ब्रोकर उसे सहने में सक्षम होगा.

Read more

Local News