जमशेदपुर: सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के साथ-साथ प्रकृति की हरियाली और उमंग से भी जुड़ा माना जाता है। इस दौरान शिवालयों में पूजा-अर्चना के बीच महिलाओं के बीच हरे रंग के कपड़े, चूड़ियां और बिंदी पहनने की परंपरा भी खूब देखने को मिलती है। जमशेदपुर में विभिन्न समुदायों की महिलाएं सावन उत्सव के जरिए इस परंपरा को उत्साह के साथ मनाती हैं।
हरियाली से जुड़ा है हरे रंग का महत्व
मान्यता के अनुसार सावन में बारिश के कारण चारों ओर हरियाली छा जाती है। इसी प्राकृतिक बदलाव के कारण हरे रंग को सावन से जोड़कर देखा जाता है। धार्मिक आयोजनों में बेलपत्र समेत कई हरी वस्तुओं का प्रयोग भी किया जाता है।
महिलाओं का मानना है कि हरा रंग हरियाली, सुख, शांति और समृद्धि का प्रतीक है। यही वजह है कि सावन के दौरान हरे परिधान और आभूषण पहनने की परंपरा कई परिवारों में पीढ़ियों से चली आ रही है।
सावन उत्सव में दिखता है हरे रंग का आकर्षण
जमशेदपुर में सावन के अवसर पर महिलाएं सामूहिक रूप से सावन मिलन और अन्य कार्यक्रम आयोजित करती हैं। इन आयोजनों में साड़ी, सूट, चूड़ियों और बिंदी समेत शृंगार की कई चीजों में हरे रंग की झलक दिखाई देती है।
इन कार्यक्रमों में उम्र की कोई बाध्यता नहीं रहती। सास, बहू, ननद और सहेलियां साथ मिलकर उत्सव का आनंद लेती हैं। सावन गीतों के साथ झूला झूलने और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में हिस्सा लेने का भी विशेष उत्साह रहता है।
परंपरा से जुड़ी हैं कई यादें
कई महिलाओं का कहना है कि उन्होंने बचपन से अपने घरों में सावन के दौरान मां और दादी को हरे कपड़े पहने देखा है। उनके लिए यह केवल पहनावे का रंग नहीं, बल्कि परिवार और परंपरा से जुड़ी एक भावनात्मक याद भी है।
महिलाओं के मुताबिक, सावन में धरती का हरियाली से भर जाना जीवन में नई ऊर्जा और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसी भावना के साथ वे हरे रंग को अपने शृंगार का हिस्सा बनाती हैं।
मेल-जोल और खुशियों का भी महीना
सावन में धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक मेल-जोल भी बढ़ता है। महिलाएं एक-दूसरे के घर जाती हैं, सामूहिक कार्यक्रम करती हैं और झूला झूलने के साथ सावन गीतों का आनंद लेती हैं।
इस तरह सावन का हरा रंग सिर्फ प्रकृति की हरियाली तक सीमित नहीं रहता, बल्कि महिलाओं के लिए आस्था, परंपरा, उत्सव और आपसी रिश्तों की मिठास का भी प्रतीक बन जाता है।
