नई दिल्ली: अब साबुन, शैंपू, टूथपेस्ट और कॉस्मेटिक जैसे रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले पैक्ड उत्पादों पर यह बताना जरूरी होगा कि उनमें शाकाहारी या पशु-आधारित सामग्री का इस्तेमाल हुआ है। केंद्र सरकार ने लीगल मेट्रोलॉजी (पैक्ड कमोडिटीज) रूल्स, 2011 में संशोधन के जरिए इस व्यवस्था को अनिवार्य किया है।
पैकेट पर दिखेगा हरा या लाल-भूरा निशान
नए प्रावधान के तहत संबंधित उत्पाद के मुख्य डिस्प्ले पैनल पर स्पष्ट प्रतीक चिन्ह देना होगा।
- शाकाहारी उत्पाद: हरे रंग का बिंदु लगाया जाएगा।
- पशु-आधारित सामग्री वाले उत्पाद: लाल या भूरे रंग का बिंदु प्रदर्शित करना होगा।
इससे उपभोक्ताओं को खरीदारी के समय उत्पाद की प्रकृति की जानकारी पैकेजिंग पर ही मिल सकेगी।
यह प्रावधान पहले नियम 6(8) के तहत लागू था। संशोधन के बाद इसे नियम 6(4A)(d) के तहत शामिल किया गया है। हालांकि, ऐसे दावों के वैज्ञानिक सत्यापन को लेकर पहले से नीतिगत मतभेद रहे हैं। इस संबंध में दिल्ली हाईकोर्ट ने संबंधित विभागों के बीच एकीकृत व्यवस्था बनाने का निर्देश दिया है।
यूपी में शाकाहारी और मांसाहारी भोजन के लिए अलग व्यवस्था
इधर उत्तर प्रदेश में भी होटल और रेस्तरां के लिए शाकाहारी तथा मांसाहारी भोजन की तैयारी को लेकर नए नियम लागू करने की तैयारी है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) के प्रस्तावित मानकों के अनुसार नवंबर 2026 से भोजनालयों में दोनों प्रकार के भोजन को अलग रखने की व्यवस्था जरूरी होगी।
इसके तहत होटल, रेस्तरां और फास्ट-फूड प्रतिष्ठानों को कुछ प्रमुख बदलाव करने होंगे।
अलग किचन: शाकाहारी और मांसाहारी भोजन तैयार करने के लिए अलग-अलग रसोई क्षेत्र रखने होंगे।
अलग बर्तन और उपकरण: चाकू, कटिंग बोर्ड, कड़ाही और दूसरे खाना पकाने वाले उपकरण दोनों श्रेणियों के लिए अलग रखने होंगे।
अलग स्टोरेज: कच्चे मांस, पोल्ट्री और सी-फूड के लिए अलग रेफ्रिजरेटर और स्टोरेज क्षेत्र तय करना होगा, ताकि उनका संपर्क शाकाहारी खाद्य सामग्री से न हो।
FSDA के मुताबिक, निर्धारित नियमों और स्वच्छता मानकों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों पर जुर्माना लगाया जा सकता है। गंभीर मामलों में लाइसेंस निलंबित करने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।
