Friday, April 24, 2026

सरकार ने वित्त वर्ष 2026 में 75 लाख एससी लाभार्थियों को ₹7,981.47 करोड़ वितरित किए, जिससे छात्रवृत्ति योजनाओं और महिला सशक्तिकरण को भारी बढ़ावा मिला.

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नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए बताया कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 (FY26) में अब तक 75 लाख से अधिक अनुसूचित जाति (SC) के लाभार्थियों को कुल 7,981.47 करोड़ रुपये की सहायता राशि वितरित की गई है. सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, यह धनराशि मुख्य रूप से हाशिए पर रहने वाले छात्रों के शैक्षिक सशक्तिकरण और सामाजिक उत्थान के लिए संचालित विभिन्न योजनाओं के तहत दी गई है.

शिक्षा के क्षेत्र में भारी निवेश
सरकार के इस कदम का सबसे बड़ा हिस्सा छात्रवृत्ति योजनाओं के माध्यम से शिक्षा पर केंद्रित रहा है. डेटा के अनुसार, पिछले वित्तीय वर्ष (FY25) की तुलना में इस साल खर्च में उल्लेखनीय वृद्धि देखी गई है.

  • प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति: अनुसूचित जाति और अन्य के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना के तहत व्यय में 21 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी हुई.
  • पोस्ट-मैट्रिक छात्रवृत्ति: उच्च शिक्षा के लिए दी जाने वाली इस प्रमुख छात्रवृत्ति में 11.23 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई.
  • टॉप क्लास एजुकेशन: एससी छात्रों के लिए ‘सेंट्रल सेक्टर स्कॉलरशिप ऑफ टॉप क्लास एजुकेशन’ के तहत खर्च में 13.5 प्रतिशत का उछाल आया है.
  • श्रेष्ठा (SHRESHTA) योजना: लक्षित क्षेत्रों के हाई स्कूलों में छात्रों के लिए आवासीय शिक्षा योजना के तहत खर्च में 16 प्रतिशत की वृद्धि हुई है.

NSKFDC के जरिए महिला सशक्तिकरण
आर्थिक सहायता के मोर्चे पर, ‘राष्ट्रीय सफ़ाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम’ (NSKFDC) ने अभूतपूर्व काम किया है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, निगम ने 29,448 लाभार्थियों को 223.47 करोड़ रुपये का रियायती ऋण वितरित किया. इसमें सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इन लाभार्थियों में लगभग 97 प्रतिशत महिलाएं थीं, जो जमीनी स्तर पर महिला सशक्तिकरण की एक बड़ी तस्वीर पेश करती हैं.

इसके अलावा, प्रति व्यक्ति औसत ऋण राशि में भी सुधार हुआ है. इस साल औसत ऋण आकार बढ़कर 77,000 रुपये हो गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 16.67 प्रतिशत अधिक है. 1997 से कार्यरत यह निगम सफ़ाई कर्मचारियों, कचरा बीनने वालों और हाथ से मैला ढोने वालों के सामाजिक-आर्थिक उत्थान के लिए प्रतिबद्ध है.

समावेशी विकास का लक्ष्य
बयान में स्पष्ट किया गया कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग न केवल अनुसूचित जातियों, बल्कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), वरिष्ठ नागरिकों, नशामुक्ति के शिकार व्यक्तियों, ट्रांसजेंडर व्यक्तियों, खानाबदोश जनजातियों (DNT) और आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों (EWS) के कल्याण के लिए भी कई योजनाएं और अधिनियम लागू कर रहा है.

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