मुंबई: वैश्विक बाजारों में जारी अनिश्चितता और अगस्त डेरिवेटिव्स एक्सपायरी के बीच गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में दबाव देखने को मिला। मिडिल ईस्ट के भू-राजनीतिक तनाव, रुपये में कमजोरी और निवेशकों की सतर्कता का असर प्रमुख सूचकांकों पर पड़ा।
सेंसेक्स और निफ्टी लाल निशान में बंद
कारोबार समाप्त होने पर बीएसई सेंसेक्स 539 अंक यानी 0.70% की गिरावट के साथ 76,933 के स्तर पर बंद हुआ। वहीं एनएसई निफ्टी 116 अंक यानी 0.48% टूटकर 24,090 पर पहुंच गया।
बैंकिंग शेयरों में भी बिकवाली रही। निफ्टी बैंक 273 अंक यानी 0.47% गिरकर 57,509 के स्तर पर बंद हुआ।
सीमेंट और मेटल शेयरों पर दबाव
सेक्टरवार कारोबार में निफ्टी सीमेंट इंडेक्स सबसे अधिक दबाव में रहा और करीब 1.33% गिरा। सरकारी बैंक, मीडिया और मेटल से जुड़े शेयरों में भी कमजोरी देखी गई।
बड़े शेयरों में एचडीएफसी बैंक, इंफोसिस और भारती एयरटेल की गिरावट ने प्रमुख सूचकांकों पर दबाव बढ़ाया।
हालांकि, बाजार के कुछ हिस्सों में खरीदारी भी हुई। फार्मा, प्राइवेट बैंक और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स से जुड़े शेयरों में हल्की मजबूती रही। बजाज फाइनेंस, टेक महिंद्रा और अडानी एंटरप्राइजेज के शेयरों में भी बढ़त दर्ज की गई।
बाजार में गिरावट की प्रमुख वजहें
1. मिडिल ईस्ट का तनाव:
मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक परिस्थितियों और स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर बनी अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई। इससे कच्चे तेल और वैश्विक व्यापार मार्गों को लेकर जोखिम की धारणा मजबूत हुई।
2. डेरिवेटिव्स एक्सपायरी:
अगस्त महीने के F&O कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी के कारण कारोबार में उतार-चढ़ाव बढ़ा। ऊंचे स्तरों पर कुछ निवेशकों की मुनाफावसूली ने भी बाजार पर दबाव बनाया।
3. रुपये में कमजोरी:
डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा में कमजोरी भी बाजार की धारणा के लिए सकारात्मक नहीं रही। रुपये का स्तर करीब 95.50 प्रति डॉलर के आसपास बताया गया, जिससे विदेशी निवेशकों को लेकर चिंता बढ़ी।
आगे बाजार की दिशा पर नजर
तकनीकी स्तर पर निफ्टी के 50-डे एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज से नीचे जाने को बाजार की निकट अवधि की कमजोरी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। 24,000 से 24,100 का क्षेत्र अब अहम सपोर्ट जोन माना जा रहा है।
बाजार विशेषज्ञों की राय है कि मौजूदा अस्थिरता के बीच निवेशकों को जल्दबाजी में बड़े निवेश से बचते हुए कंपनियों के फंडामेंटल पर ध्यान देना चाहिए। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के चेयरमैन के आगामी जैकसन होल संबोधन से मिलने वाले संकेत भी वैश्विक बाजारों के लिए महत्वपूर्ण रहेंगे।
