नई दिल्ली, 22 अक्टूबर 2026। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने शिशु आहार के प्रचार और खाद्य उत्पादों से जुड़े कथित भ्रामक दावों को लेकर कई कंपनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं। इनमें नेस्ले इंडिया, एबॉट हेल्थकेयर, न्यूट्रिशिया इंटरनेशनल, मीड जॉनसन न्यूट्रिशन और जायडस वेलनेस शामिल हैं। सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर इरा फातिमा को भी इस मामले में नोटिस दिए जाने की खबर है।
नियामक ने शिशु दूध के विकल्पों के प्रचार और कुछ उत्पादों के विज्ञापनों में किए गए दावों पर सवाल उठाए हैं। संबंधित कंपनियों से इन दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे गए हैं।
इंस्टाग्राम रील से शुरू हुआ मामला
रिपोर्ट के मुताबिक, विवाद इंस्टाग्राम पर साझा की गई एक वीडियो रील से जुड़ा है। इसमें नवजात शिशुओं के लिए इस्तेमाल होने वाले पांच फॉर्मूला मिल्क उत्पादों की सिफारिश की गई थी। इनमें शामिल हैं:
- नैन-प्रो 1
- एप्टामिल प्रीमियम 1
- सिमिलैक एडवांस 1
- एनफामिल ए प्लस स्टेज 1
- डेक्सोलैक 1
रील में इन उत्पादों को नवजात शिशुओं के पोषण, प्रतिरक्षा क्षमता और मस्तिष्क के विकास से जोड़कर दावे किए गए थे।
FSSAI ने कथित प्रचार पर आपत्ति जताते हुए इसे शिशु दूध विकल्प, दूध पिलाने की बोतल और शिशु आहार (उत्पादन, आपूर्ति एवं वितरण का विनियमन) अधिनियम, 1992 के प्रावधानों के संदर्भ में उठाया है। भारत में इस कानून के तहत शिशु दूध विकल्पों और संबंधित उत्पादों के प्रचार पर कड़े प्रतिबंध हैं।
नेस्ले के उत्पादों के दावों पर भी सवाल
FSSAI ने नेस्ले इंडिया के दो उत्पादों—‘लैक्टोजन प्रो 1 पाउडर’ और ‘नैन एक्सेला प्रो स्टेज 1’—से जुड़े विज्ञापनों पर भी सवाल उठाए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, उत्पादों में मौजूद व्हे प्रोटीन के आसानी से पचने और पांच प्रकार के ह्यूमन मिल्क ओलिगोसैकराइड्स (HMOs) से बच्चों की प्रतिरक्षा क्षमता को लाभ मिलने जैसे दावे किए गए थे। नियामक ने इन दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण मांगे हैं।
खाद्य उत्पादों के विज्ञापनों में स्वास्थ्य और पोषण संबंधी दावों का वैज्ञानिक आधार होना जरूरी है। ऐसे दावों की जांच उपभोक्ताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जाती है।
कॉम्प्लान के ‘2X फास्टर ग्रोथ’ दावे पर आपत्ति
जायडस वेलनेस के लोकप्रिय हेल्थ ड्रिंक कॉम्प्लान के पैक पर छपे कुछ दावों को लेकर भी नियामक ने सवाल किए हैं। इनमें ‘2X फास्टर ग्रोथ’ यानी दोगुनी तेजी से विकास और एकाग्रता तथा याददाश्त में मदद जैसे दावे शामिल हैं।
FSSAI ने कंपनी से इन दावों के समर्थन में वैज्ञानिक प्रमाण देने को कहा है। खास तौर पर उत्पाद के सेवन से बच्चों की वृद्धि दोगुनी तेजी से होने के दावे का आधार स्पष्ट करने को कहा गया है।
जवाब देने के लिए तय समयसीमा
रिपोर्ट के मुताबिक, संबंधित कंपनियों और पक्षों को कारण बताओ नोटिस जारी कर निर्धारित समयसीमा में जवाब देने को कहा गया है। उनसे यह स्पष्ट करने को कहा गया है कि खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम, 2006 के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
ध्यान देने वाली बात यह है कि कारण बताओ नोटिस जारी होना अपने आप में उल्लंघन का अंतिम कानूनी निष्कर्ष नहीं है। आगे की कार्रवाई संबंधित पक्षों के जवाब और नियामक की जांच के नतीजों पर निर्भर करेगी।
शिशुओं और बच्चों के पोषण से जुड़े उत्पादों के विज्ञापनों में सटीक और प्रमाण-आधारित जानकारी देना अहम है। ऐसे मामलों में नियामकीय जांच का उद्देश्य उपभोक्ताओं को भ्रामक दावों से बचाना और खाद्य उत्पादों के प्रचार में लागू नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
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